श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “पढ़े-लिखे लोग…“।)
अभी अभी # ९०९ ⇒ आलेख – पढ़े-लिखे लोग
श्री प्रदीप शर्मा
हमारे समाज में तीन तरह के लोग रहते है ! काला अक्षर, साक्षर और पढ़ा-लिखा। काला अक्षर को आप निरक्षर भी कह सकते हैं। आरंभ में सभी काला अक्षर होते हैं। अक्षर ज्ञान होते ही वे साक्षर हो जाते हैं। जब वे पढ़ना और लिखना सीख जाते हैं, तो पढ़े-लिखे कहलाते हैं।
यह पढ़ना और लिखना इतना आसान भी नहीं ! बिना पढ़े लिखना नहीं आता। अ के साथ अनार और अं के साथ अंगूर देखकर अक्षर ज्ञान होता है। जो पढ़ा है, वह लिखकर भी बताना पड़ता है। जो पढ़ा है, उसकी परीक्षा लिखकर देनी होती है। उत्तीर्ण होने पर पढ़ाई जारी रहती है। अनुत्तीर्ण होने पर पढ़ाई रुक जाती है। आदमी पढ़ा-लिखा कहलाने से वंचित हो जाता है।।
जो पढ़-लिख कर आगे बढ़ जाते हैं, वे पढ़े-लिखे इंसान कहलाते हैं। जो पढ़-लिखकर भी आगे नहीं बढ़ पाते, लोग उन्हें पढ़ा-लिखा मानने से इंकार कर देते हैं। इतनी पढ़ाई-लिखाई किस काम की, इससे तो घास ही छीलते, तो अच्छा था। वैसे राग दरबारी में घास छीलने को पीएचडी करना कहा गया है, लेकिन आजकल पीएचडी करना, घास छीलना जितना आसान भी नहीं।
एक पढ़े-लिखे इंसान से लोग दुनिया भर की उम्मीदें लगाए बैठे होते हैं, यह ये कर लेगा, यह वो कर लेगा। इसको देखो, उसको देखो। कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती। जब तक वह कुछ कमाता-धमाता नहीं, लोग उसे पढ़ा-लिखा मानने से इंकार कर देते हैं, लानत है ! पढ़े-लिखे हो, कुछ करते क्यों नहीं !और जैसे ही उसकी एक अच्छी नौकरी लगी, वह एक अच्छा पढ़ा- लिखा, काबिल इंसान बन जाता है।।
जो ज़्यादा पढ़-लिख नहीं पाते, लेकिन किसी पुश्तैनी धंधे में महारत हासिल कर लेते हैं, अच्छा पैसा कमा लेते हैं, वे पढ़े-लिखे लोगों के लिए आदर्श साबित होते हैं। तुमने पढ़-लिखकर, इतने साल की नौकरी में क्या तीर मार लिया। महेश को देखो, एक कपड़े की दुकान से आज छः दुकानें खड़ी कर ली।
पढ़ाई के साथ इंसान में दिमाग भी होना चाहिए। आर्थिक रूप से सम्पन्न होना एक पढ़े-लिखे इंसान की पहली शर्त है। लोग डॉक्टर, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट को अधिक पढ़ा-लिखा मानते हैं। प्रोफेसर, पत्रकार और लेखक भी पढ़े-लिखों की जमात में ही आते हैं।
राजनीति और समाज सेवा एक आदर्श प्लेटफार्म है, जिस पर बिना भेदभाव और ऊंच-नीच के कोई भी व्यक्ति, साधारण शिक्षा के बल पर भी, अपना स्थान बना सकता है। मोदीजी, बाबा आमटे, अन्ना हजारे, बाबा रामदेव और कैलाश सत्यार्थी जैसे कई ज्वलंत उदाहरण हमारे सामने हैं, जिन्होंने जन-जागरण और सामाजिक उत्थान में अपना अमूल्य योगदान दिया है।।
एक पढ़े-लिखे इंसान से यह उम्मीद भी होती है कि वह समझदार और ईमानदार भी हो। समझदारी और ईमानदारी की कोई डिग्री नहीं होती, कोई यूनिवर्सिटी नहीं होती। समाज में विसंगतियों के लिए जितना एक कम पढ़ा-लिखा जिम्मेदार है, उतना ही एक अधिक पढ़ा-लिखा भी। आज समाज को जितना खतरा चोर-डाकुओं से नहीं, उससे अधिक खतरा भ्रष्ट और बेईमानों से है।
एक पढ़ा-लिखा आदमी अगर रिश्वत लेता और देता है, एक व्यापारी अगर मिलावट और बेईमानी से पैसा कमाता है, तो
दोनों ही देश के दुश्मन हैं। ईमानदारी ही देशभक्ति है, राष्ट्रीयता है। अगर आप ईमानदार हैं तो पढ़े लिखे, समझदार हैं, अन्यथा जाहिल गँवार और देशद्रोही हैं।।
© श्री प्रदीप शर्मा
संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर
मो 8319180002
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




