श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “ट्रक, टायर और सटायर…“।)
अभी अभी # ९१८ ⇒ आलेख – ट्रक, टायर और सटायर
श्री प्रदीप शर्मा
जिन्होंने राग दरबारी पढ़ी है, वे जानते हैं कि उपन्यास का आरंभ एक ट्रक से होता है, जिसका जन्म, लेखक के अनुसार, कथित रूप से, केवल सड़क के साथ बलात्कार करने के लिए ही हुआ है। ट्रक हो, या ट्रक चालक, वे टायर तो समझते हैं, लेकिन सटायर नहीं समझते, इसलिए कभी तिल का ताड़ नहीं बन पाया और बेचारा ट्रक बदनाम हो गया।
समय के साथ ट्रक में चेतना जागी और अचानक उसका ज़मीर जाग उठा। ट्रकों की ओर से एक संयुक्त बयान आया कि एक व्यंग्यकार द्वारा यह हमारी छवि धूमिल करने का कुत्सित प्रयास है। हम कभी सड़क के संपर्क में आते ही नहीं। सड़क के साथ बलात्कार का दोषी टायर है। वही सड़क के संपर्क में आता है, परिणाम स्वरूप खुद भी घिस जाता है और प्रमाण के रूप में सड़क को भी क्षत – विक्षत कर जाता है। हमेशा टायर ही भ्रष्ट (burst) होता है, ट्रक नहीं। टायर की खराब नीयत के ही कारण सड़कों पर कई दुर्घटनाएं भी होती हैं।।
ट्रकों का यह भी मानना है कि इससे उनकी मानहानि हुई है। जो सटायर टायर पर होनी थी, वह अनजाने में ट्रकों के ऊपर हो गई है। वे तो बेचारे सिर्फ समान ढोने का काम करते है और अपने पीछे यातायात की हिदायतें ही नहीं, बुरी नजर वाले, तेरा मुंह काला जैसे नीति वाक्य भी लिख रखते हैं। उन्हें क्या पता कि उनके ही ट्रक के नीचे लगे टायर कभी उसका ही मुंह काला करवाएंगे।
जिस तरह सत्य के कई पहलू होते हैं, व्यंग्य के भी कई पहलू होते हैं। आप उन्हें शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष भी कह सकते हैं। बिना टायर के जब किसी ट्रक की पहचान नहीं, तो
इस इल्जाम में भी टायर का भी उतना ही हाथ है जितना ट्रक का। पाठक जब भी ट्रक के बारे में यह सटायर पढ़ें, टायर को अनदेखा ना करें। एक बेचारा ट्रक और कभी चार तो कभी चौदह टायर, और बलात्कार का आरोप ट्रक पर, व्हाट अ सटायर।।
© श्री प्रदीप शर्मा
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