श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “सबक।)

?अभी अभी # ९३२ ⇒ आलेख – सबक ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

सीखने और सिखाने को सबक कहते हैं ! बच्चे बहुत ज़ल्दी सीखते हैं। बचपन में स्कूल में जो भी सबक दिया जाता है, उसे उन्हें सीखना पड़ता है। अगर सबक ठीक से याद नहीं हुआ, तो गुरु जी को सबक सिखाना भी आता है। पढ़ा हुआ सबक भले ही हम बड़े होकर भूल जाएं, लेकिन वह सबक ज़रूर याद रहता है, जिसमें बेंत से हथेलियां गर्म हो जाया करती थीं, और मुर्गा बनाकर पीठ पर डस्टर रख दिया जाता था।

सबक को पाठ भी कहते हैं ! पाठशाला शब्द भी पाठ से ही बना है। वैसे बच्चे की पहली पाठशाला तो उसकी माँ ही होती है। माँ सा प्यार देने वाली माँ मासी कहलाती है और मदर-सा पाठ पढ़ाने वाली संस्था मदरसा कहलाती है। काश ! सभी मदरसों में मदर-सा पाठ पढ़ाया जाता, तो किसी भी कौम को सबक सिखलाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।।

जो सबक हमारे लिए सबक है, एक पाठ है, वही अंग्रेज़ी का lesson है। आज की पीढ़ी सबक याद नहीं करती, पाठ नहीं पढ़ती, वह lesson याद करती है। अगर lesson याद नहीं होता, तो कांवेंटी मेम बच्चे को उनकी भाषा में punish करती है, कुछ इस तरह – I will teach you a lesson. और बालक वह lesson ज़िन्दगी भर नहीं भूलता।

सबक ठीक से याद करने से ज़िन्दगी बन जाती है। जो सबक इंसान अपनी ज़िंदगी में सीखता है, वही सबक वह दूसरों को सिखाता है। गुरु-शिष्य संबंध भी सीखने सिखाने का ही रिश्ता है।

अगर अपना भविष्य उज्जवल बनाना है तो पाठशाला और मदरसे से कुछ नहीं होता, कोचिंग संस्थान की शरण भी लेनी पड़ती है।।

आश्चर्य तो तब होता है, जब ज़िन्दगी के सभी सबक एक तरफ हो जाते हैं, और सास दाँतों तले उंगली दबा कहती है – बहू ने न जाने कैसी पट्टी पढ़ा दी है कि बबलू हाथ से ही निकल गया। फ़िल्मी भाषा में शायद इसे ही प्यार का सबक कहते हैं।

कितनी विचित्र बात है ! हमारे समय में सबक की शुरुआत पट्टी से ही होती थी। एक पट्टी पेम ही हमारा बस्ता होता था। जो अक्षर और अंक हमने बचपन में पट्टी पर लिख लिखकर सीख लिए, उससे ज़िन्दगी की एक इबारत बन गई। या तो ज़िन्दगी का गणित सुलझ गया या उलझ गया। किसी ने एक शब्द प्यार सीख लिया तो वह मसीहा बन गया और किसी ने अगर ज़िहाद सीख लिया तो वह आतंकी बन गया।।

अच्छा सबक ज़िन्दगी देता है, ज़िन्दगी बनाता है। जो हमें एक नेक इंसान बनाये, वही शिक्षा ! अगर हर पढ़ा लिखा इंसान नेक बन जाता तो क्या आज संसार में अमन चैन नहीं होता ? दुर्योधन, कंस, रावण, हिटलर और लादेन को ऐसी क्या घुट्टी पिलाई गई कि वे मानवता के लिए कलंक साबित हुए।

एक समझदार कौम वही, जो ग़लतियों से सबक ले ! किसी एक हैवान के जुनून से बर्बाद जापान जैसे देश ने दुनिया को जतला दिया कि दृढ़ संकल्प, परिश्रम, निष्ठा और देश के प्रति समर्पण से कितना ऊपर उठा जा सकता है। हमें किसी से सबक सीखना भी है, और किसी को सबक सिखलाना भी है।

यह संसार वाकई एक पाठशाला है।।

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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