श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “हल्दी और मेंहदी।)

?अभी अभी # ९६१ ⇒ आलेख – हल्दी और मेंहदी ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

हल्दी और मेंहदी दो ऐसी दी हैं, जो अपने ही रंग में रंगी हुई हैं, और जिसके हाथ लग जाती हैं, उन्हें भी हाथों हाथ रंग जाती हैं।

जहां भी रस्म है, रिवाज है, उत्सव है, तीज त्योहार है, खुशी का मौका है, शादी ब्याह है, दोनों दीदियां सज धजकर तैयार हैं।

हल्दी अगर एक गांठ है तो मेंहदी एक हरा भरा कांटेदार पौधा। हल्दी इतनी हेल्दी है कि खाई भी जाती है और लगाई भी जाती है। जब कि मेंहदी सिर्फ लगाई जाती है। कुदरत ने इन दोनों को इतना तबीयत से रंगा है कि जो भी इन्हें पीसता है, अथवा घोलता है, खुद इनके रंग में सराबोर हो जाता है।।

मेंहदी लगी मेरे हाथ! सिर्फ हाथ ही क्यों ? सर से पांव तक आजकल मेंहदी का सम्राज्य फैला हुआ है। कहीं कहीं तो यह आलम है कि रविवार की छुट्टी का दिन मेंहदी दिवस ही बन जाता है। मेंहदी आजकल सिर्फ श्रृंगार नहीं, फटते पांवों के लिए राहत है, किसी के लिए शौक है तो किसी के लिए रोजगार। चारों ओर फल फूल रहा मेंहदी का कारोबार।

गोरे गोरे हाथों में मेंहदी लगा के

नैनों में कजरा डाल के।

चली दुल्हनिया पिया से मिलने

छोटा सा घूंघट निकाल के।।

एक नहीं ऐसे कई लोकगीत ढोलक की थाप पर महिलाओं द्वारा गाये जाते हैं जब मेंहदी और हल्दी की रस्म होती है।

मेंहदी तो खैर महिलाओं की जीवन संगिनी है लेकिन हल्दी रस्म बड़ी खास होती है। एंटी बैक्टिरियल और एंटीसेप्टिक गुण तो होते ही हैं हल्दी में, रंग में निखार तो आता ही है, एक तरह का उबटन ही तो है हल्दी। हल्दी लगाई नहीं जाती, लगवाई जाती है। दूल्हा हो अथवा दुल्हन, गालों पर कितनी उंगलियां हल्दी लगाती हैं, कोई हिसाब नहीं।।

मेंहदी जहां जहां भी रच जाती है, बस प्रेम और रंग बरसाती है। जब कि हल्दी दूध में भी घुल जाती है, हड्डियों को मजबूत ही नहीं करती, खून भी बढ़ाती है। हल्दी का नाम लेकर हल्दीराम भले ही मशहूर हो गया हो, हमारे घर में एक बार नमक नहीं हो, चलेगा, हल्दी नहीं हो, नहीं चलेगा। कच्ची हल्दी भी बड़ी गुणकारी होती है। इसका अचार भी बनता है और सब्जी भी।

कैसी कहावत है यह, हींग लगे ना फिटकरी….? जब कि ना हींग में कोई रंग है और ना ही फिटकरी में। माना कि हींग में ही हिना के समान ही खुशबू है और फिटकरी पानी साफ करती है लेकिन जब भी चोखे रंग की बात होगी, खुशबू और महक की रात होगी, वहां हल्दी और मेंहदी हमेशा साथ होंगी। देखिए मेंहदी का रंग ;

बन्नी के गोरे गोरे हाथ

मेंहदी लगाओ रे।

इस पे बन्ने का लिख दो

नाम ..!!!

और अब हल्दी का रंग ;

सोने के कटोरवा में पिसल

हरदी अम्मा लहे लहे

हरदी लगावे ;

चटकार अम्मा लहे लहे।।

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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