डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम’
(पूर्णिका’ के जनक साहित्याचार्य एडवोकेट डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम’)
☆ पूर्णिका – जो हमेशा लड़े हैं हमारे लिये… ☆ डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम’ ☆
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घर की बातें किसी को बताना नहीं
आग अपने ही घर में लगाना नहीं
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जो है औकात उसकी बिठाना वहीं
बैठ जाये तो उसको उठाना नहीं
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जो हमेशा लड़े हैं हमारे लिये
उनकी नजरों से हमको गिराना नहीं
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कष्ट मुझको हुआ आपको भी तो है
फिर भी दुखियों का दिल दुखाना नहीं
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जो गलत हो रहा है उसको होने दो तुम
लेकिन तुम भी गलत कुछ कराना नहीं
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हैं गलत जो भी रश्में उन्हें तोड़ दो
घर की बुनियाद झूठी बनाना नहीं
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बन्दगी इश्क की जिस जगह पै न हो
‘प्रेम‘ ऐसी जगह आना-जाना नहीं ।
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© डॉ. सलपनाथ यादव ‘प्रेम’
पूर्णिका जनक, साहित्याचार्य एडवोकेट
संपर्क – 2451, आदर्श भवन, अनुराग मार्ग, गांधीनगर, न्यू कंचनपुर, अधारताल, जबलपुर (म.प्र.) पिन – 482004
मो. – 9302189724, 09300128144, ई-मेल: salapnathyadav@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






