श्री परम शिवम

(ई-अभिव्यक्ति में श्री परम शिवम (डी आई जी – सी आर पी एफ) का स्वागत. पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक तथा वाणिज्य में स्नातकोत्तर उपाधि। अनुशासित जीवन के साथ एक संवेदनशील हृदय. हम श्री परम शिवम जी का साहित्य आपसे समय समय पर साझा करते रहेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी दो कविताएँ – [1] सफ़र [२] यात्राओं के स्वप्न .)

दो कविताएँ – [1] सफ़र [२] यात्राओं के स्वप्न ☆ श्री परम शिवम ☆

[ १ ]

 सफ़र ☆ 

मै सफ़र याद करता

तो लोग याद आते

लोगों को याद करो

तो उनकी बातें

बातें

तो चेहरे

चेहरे !

तो उनपे पड़ती धूप, बुद्ध-स्तूप

धूप !

तो आँखे घिरी धूप में

आँखे याद करूँ

तो अपने ही स्वप्न याद आते-

पहाड़ों से गुजरते

देवदार पे सुस्ताते

अजानों को देख मुस्काते

और कभी किसी किनार पे डरता

मै सफ़र याद करता…

 

[ २ ]

☆ यात्राओं के स्वप्न  

यात्राओं से ज़्यादा

मेरे पास यात्राओं के स्वप्न रहे !

मैँ हर उस पहाड़, नदी, सिंधु-तट को जानता

जिसकी तरफ कोई पगडंडी जाती

या नहीं जाती

मैनें हर टपरे में चाय पी

काली चाय !

कई बार धूल-धक्कड़ से सना उठा

और सूर्योदय जमा किए

प्रकृति को घूरकर देखा

और चेहरों को कनखियों से

उतने जीवनों से मिला नहीं

स्मृति में जितने जीवन रहे

यात्राओं से ज़्यादा

मेरे पास यात्राओं के स्वप्न रहे !

© श्री परम शिवम्  

डी आई जी, सी आर पी एफ, गुरुग्राम  

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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Pravin Raghuvanshi

अतिसुंदर कविताएं