प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे

☆ महारानी लक्ष्मीबाई ☆ प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे ☆

☆

लक्ष्मीबाई नाम था, वीरों की थी वीर।

राज्यहरण उसका हुआ, तो चमकी शमशीर।।

* 

ब्रिटिश हुक़ूमत से भिड़ी, रक्षित करने राज।

नमन आज तो कर रहा, देखो सकल समाज।।

 *

शौर्यवान रानी प्रखर, जिसका मनु था नाम।

उसके कारण ही बना, झाँसी पावनधाम।।

 *

स्वाभिमान को धारकर, छेड़ दिया संग्राम।

झाँसी दे सकती नहीं, हो कुछ भी अंज़ाम।।

 *

रानी-साहस देखकर, घबराये अंग्रेज़।

यहाँ-वहाँ भागे सभी, लखकर रानी तेज।।

 *

घोड़े पर चढ़ भिड़ गई, चली प्रखर तलवार।

दुश्मन मारे अनगिनत, किए वार पर वार।।

 *

पर दुश्मन बहुसंख्य था, कैसे पाती पार।

गति वीरों वाली हुई, करो सभी जयकार।।

 *

मर्दानी थी लौहसम, अमर हुआ इतिहास।

लक्ष्मीबाई को मिली, जगह दिलों में ख़ास।।

 ☆

© प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे

प्राचार्य, शासकीय महिला स्नातक महाविद्यालय, मंडला, मप्र -481661

(मो.9425484382)

ईमेल – khare.sharadnarayan@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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