हेमन्त बावनकर
☆ “पुरुष…!” (मराठी कविता) – सुश्री प्रभा सोनवणे ☆ (हिन्दी भावानुवाद) हेमन्त बावनकर ☆
सुश्री प्रभा सोनवणे
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☆ पुरुष…! ☆
तुम वास्तव में एक महान पुरुष हो,
कदाचित, मैं कुछ भी नहीं हूँ।
मैंने तुमसे पूछा था,
तुम्हारी सिगरेट का ब्रांड,
तब तुमने कहा था,
“ऐसी कोई आदत नहीं है मुझे!”
ऐसे हो तुम स्वच्छ, सात्विक,
सद्गुणी!
लोग कहते हैं,
तुम्हें कोई जरूरत ही नहीं,
अध्यात्म की
तुम स्वयं ही अध्यात्म हो,
इतने निष्कलंक!
तुम्हारी कटु भाषा,
पुरुष अहंकार,
अनुभव से भी, मैंने स्वीकारा
तुम्हारा महान होना,
तुम ही हो पुरुषोत्तम!
किन्तु, मैं बहुत अलग हूँ,
तुमसे—
अत्यंत सामान्य!
इसीलिए मैं कभी पहुँच ही न सकी,
तुम्हारी ऊंचाइयों तक!
बस, इतना ही भाग्य है
हम दोनों का!
☆ ☆
भावानुवाद – हेमन्त बावनकर
पुणे
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






🙏
अप्रतिम अनुवाद! धन्यवाद भाईसाब 🙏
बहुत सुंदर।