श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # १९६ ☆ देश-परदेश – World Mental Health Day: 10 Oct. ☆ श्री राकेश कुमार ☆

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस विगत 1992 से मनाया जाना आरंभ हुआ था। इस का तात्पर्य तो, ये हुआ उससे पूर्व हम सबका मानसिक स्वास्थ्य ठीक ही रहता होगा।

हमें याद आती है, अपनी युवावस्था जब घर के बड़े हमेशा ये ही कहते, थकते नहीं थे, कि आज की औलादों का तो दिमाग ही खराब हो गया है।

आज हम भी अपने बच्चों को ये ही तो कह रहें है, कि ये तो अलग तरह की पीढ़ी है। इतनी बिगड़ी हुई है, कभी सोचा भी नहीं था। जेन जी की भाषा और हाव भाव देख सुन कर हमारी आयु वर्ग के लोगों के दिमाग का दही बन जाता है।

हमारे पिताश्री ने घर में पहली बार टीवी को देखकर एक माह तक हमसे बात नहीं करी थी। आज टीवी के नेटफ्लिक्स चैनल पर स्तरहीन भाषा और दृश्यों को देखकर हमने भी अपने बच्चों का एक माह बहिष्कार किया था।

देखा जाय, तो मानसिक स्वास्थ्य को खराब करने के लिए समय समय पर नए नए कारण मिलते हैं। हम आज को पहचानने के स्थान पर अपना पुराना समय और परिस्थितियों में अटके रहते हैं। वर्त्तमान को नकार कर पूर्वकाल के साये से निकल नहीं पाते हैं।

आज का समय यू ट्यूब, फेस बुक से भी बहुत आगे जा चुका हैं। आने वाला समय और कुछ लाएगा। ये सिलसला सतत चलता रहेगा।

हमारे कुछ करीबी मित्र तो हमारे मुंह पर ये भी कह देते है, कि हमारा दिमाग कुछ हिल गया है, इसलिए प्रतिदिन कुछ भी लिख कर व्हाट्स ऐप पर पोस्ट करते रहते हैं। भले ही कोई पढ़े या ना पढ़ें।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted