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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)
स्मृतिशेष उर्मि कृष्ण जी की प्रथम पुण्यतिथि पर ‘श्रद्धांजलि सभा’ आयोजित
साभार – श्री विजय कुमार
शास्त्री कॉलोनी स्थित ‘कहानी लेखन महाविद्यालय’ एवं ‘शुभ तारिका’ के संस्थापक डॉ. महाराज कृष्ण जैन की धर्मपत्नी प्रख्यात साहित्यकार, कहानीकार, संपादक एवं निदेशक श्रीमती उर्मि कृष्ण जी की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के आरंभ में एक मिनट का मौन रखकर श्रीमती उर्मि कृष्ण जी को स्मरण किया गया।
चूंकि यह एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम था, इसलिए श्रद्धांजलि देने आए कुछ प्रबुद्धजनों को मंच तो प्रदान किया गया किंतु न इसने कोई अध्यक्ष था और न ही मुख्य अतिथि। बहुत ही सौम्य व शांत वातावरण में इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मध्य पर उपस्थित प्रबुद्धजनों द्वारा पिछले 54 वर्षों से निरंतर प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘शुभ तारिका’ के ‘श्रीमती उर्मि कृष्ण स्मृति विशेषांक’ का विमोचन भी किया गया।
इस श्रद्धांजलि सभा में साहित्यकारों/लेखकों एवं क्षेत्रवासियों ने उर्मि कृष्ण जी के जीवन की घटनाओं पर आधारित अपने उद्गार प्रस्तुत किए। शास्त्री कॉलोनी निवासी समाजसेवी हंसराज माही ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. महाराज कृष्ण जैन की जीवनसंगिनी ने जीवनपर्यन्त उनका साथ निभाया व सरलतम, सौम्य तथा पावन जीवन व्यतीत किया। ओमप्रकाश बनमाली ने कहा कि दुबली-पतली व सामान्य विचारधारा की धनी उर्मि कृष्ण ने वर्ष 1971 में दिव्यांग महाराज कृष्ण जैन से सच्चा प्रेम विवाह किया तथा उर्मि दुब से उर्मि कृष्ण बनने तक की कथा दिव्य अमर प्रेम को परिलक्षित करती है। सहारनपुर से आए ‘प्रेमवाणी’ के संपादक सतीश आर्य ने कहा कि उर्मि कृष्ण ने ‘कहानी लेखन महाविद्यालय’ के द्वारा अपनी हसमुख, सहयोगी छवि से अनेक रचनाकार, साहित्यकार व पत्रकार स्थापित किए। उन्होंने हमेशा जीवन में सदा दृढ़ इच्छाशक्ति को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि हमें हमेशा लीक से हटकर कार्य करने चाहिए। कुरुक्षेत्र से आईं डॉ. उषा लाल ने कहा, सादगी को लिखने वाले बहुत हैं परन्तु साहित्य को जीना विरले ही कर पाते हैं। उर्मि जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन साहित्य को समर्पित कर दिया। ‘शुभ तारिका’ पत्रिका के संपादक विजय कुमार ने कहा कि मुझे कुन्दन की तरह तपाने का श्रेय डॉ. महाराज कृष्ण जैन व श्रीमती उर्मि कृष्ण जी को जाता है। मैं एक सामान्य व्यक्ति था, मेरा पत्रकारिता व साहित्य से दूर-दूर तक वास्ता नहीं था किंतु मुझे इनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। विजय ने कहा कि पत्रिका ‘शुभ तारिका’ को निरंतर प्रकाशित करना ही हमारी ओर से श्रीमती उर्मि कृष्ण जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला से पधारे श्री चितरंजन दयाल कौशल (निदेशक, संस्कृत प्रकोष्ठ) ने कहा कि श्रीमती उर्मि कृष्ण जी का परिचय केवल एक पृष्ठ में रखकर एक मोटे ग्रन्थ के रूप में प्रकाशित होना चाहिए। उनके साहित्य और पत्रिका ‘शुभ तारिका’ को संभाला जाना चाहिए। डॉ. नफ़स अंबालवी ने बताया, उर्मि कृष्ण जी के चेहरे पर हमेशा हंसी बिखरती रहती थी, कभी भी उनके चेहरे पर क्रोध दिखाई नहीं दिया। ऐसी पुण्य आत्माएं यदाकदा ही संसार में आती हैं। शास्त्री कॉलोनी मंदिर के पं. अनूप शर्मा जी के अनुसार वे धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं एवं विजय कुमार के साथ मंदिर में प्रभु दर्शन को आती थीं। धर्म के प्रति उनकी आस्था थी। विजय कुमार ने पुत्र की तरह उनकी अंतिम समय तक सेवा की। डॉ. विनय मल्होत्रा ने गीत के रूप में श्रीमती उर्मि कृष्ण जी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। डॉ. प्रदीप शर्मा ‘स्नेही’ ने उर्मि कृष्ण जी के जीवन वृत्तान्त को बताते हुए कहा कि उर्मि जी मात्र एक साहित्यकार ही नहीं थीं अपितु मानवता की मिसाल भी थीं। उनके देहदान के निर्णय की हमेशा सराहना की जाएगी। डॉ. गुलशन राय शर्मा ने कहा कि डॉ. महाराज कृष्ण जैन व उर्मि कृष्ण जी के साथ उनके पारिवारिक संबंध थे। वे उनके पारिवारिक चिकित्सक भी थे। उन्होंने कृष्ण दम्पति के साथ बिताये हुए कुछ किस्से भी सुनाये।
डॉ. शशि धमीजा ने अम्बाला के प्रत्येक व्यक्ति को उर्मि कृष्ण जी की पत्रिका ‘शुभ तारिका’ से जुड़ने एवं इसकी आजीवन सदस्यता लेने की अपाल की। राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि उर्मि कृष्ण जी हमेशा डॉ. महाराज कृष्ण जैन जी के साथ प्रत्येक क्षण खड़ी रहीं। उन्होंने कहा कि मैं डॉ. महाराज कृष्ण जैन परिवार से पिछले 40 वर्षों से जुड़ा हुआ हूँ। डॉ. साहब के कई किस्से राजेन्द्र जी ने सुनाये। सुभाष बंसल एवं अंजलि सिफ़्र ने भी उर्मि कृष्ण जी को श्रद्धांजलि देते हुए अपने उद्गार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का सफल संचालन ओमप्रकाश बनमाली ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन विजय कुमार ने दिया। सभी ने सफल कार्यक्रम के लिये आयोजकों विजय कुमार एवं पंकज शर्मा को बधाई दी।
इस अवसर पर देवचंद (कालका), कृष्ण (पंचकूला), ओमप्रकाश (कुरुक्षेत्र), पंकज शर्मा, रेनू, आत्मा सिंह, जगमाल राणा, मुकेश, संजय, पायल, रचित, रितु, आर्यन, युवराज, विजय शर्मा, ममता शर्मा, मुदित जैन, आश्विन, राजकुमार एवं शास्त्री कॉलोनीवासी अरूणा खेड़ा, सविता, नीता, सीमा जैन, रवि जैन, विवेक जैन, श्वेता जैन, दीपक शर्मा आदि उपस्थित थे।
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






