श्री जयपाल

 

(सुप्रसिद्ध लेखक श्री जयपाल जी पंजाब शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। आपका एक कविता संग्रह ‘दरवाजों के बाहर‘  आधार प्रकाशन  से प्रकाशित। (इस संग्रह पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में शोधकार्य), कुछ कविताएं पंजाबी में  अनुदित (पुस्तक रूप में प्रकाशित)।पत्र-पत्रिकाओं में लगातार रचनाएं प्रकाशित। देस-हरियाणा पत्रिका (कुरुक्षेत्र) के सह संपादक । प्रदेशाध्यक्ष- जनवादी लेखक संघ हरियाणा।

आज प्रस्तुत है समसामयिक विषय पर  आपकी कविताएँ “उनका नया साल”का सार्थक विमर्श ।

☆ “उनका नया साल” – छः कविताएँ ☆  श्री जयपाल ☆

☆

=1=

जिनकी छाती पर

शताब्दियों के दर्द का कैलेंडर लटका है

उनके माथे पर

नया साल लिखने से क्या होगा !

 

=2=

उनके लिए

साल नया हो या पुराना

ईश्वर की तरह होता है

जो कहीं दिखाई नहीं देता

 

=3=

साल के पहले ही दिन

नंगे पैर भीख मांगता बच्चा

नये साल में प्रवेश कर रहा है

नंगे पैर ही उसे पार करना है

नए साल का जश्न

 

=4=

बच्चा देखता है

नये साल का कैलेंडर

पेट दबाकर

मां देखती है

पिछले साल का कैलेंडर

आंसू छिपाकर

 

=5=

नये साल में पसर गया है

पिछले साल का सन्नाटा

लोग कहते हैं

साल बदल गया है !

 

=6=

घर में टांग लिया है

नए साल का कैलेंडर

समाज में टंगा है

हजारों साल पुराना कैलेंडर

 

© श्री जयपाल 

संपर्क- 112-ए /न्यू प्रताप नगर, अम्बाला शहर( हरियाणा)-134007 – फोन-94666108

jaipalambala62@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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