मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग

?  कविता – कुर्बानी… ? मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग ☆

बाज़ार गुलज़ार था

वो चीज़ नहीं मिल रही थी

जिसकी ज़रूरत थी

हताश होकर

पूछताछ की

तब पता चला कि

” सत्य की दुकान “

बहुत पहले बंद हो गई है

इसका दुकानदार फ़ाक़े करते

भूख से मर गया

अब वहाँ एक वीराने में

उसकी एक दरगाह है

जहाँ  झूठ की ख़ुशबूदार अगरबत्तियां

ढ़ेरों सरपरस्त रोज़ सुलगाया करते हैं

हर बरस

एक मेला लगता हैं वहां

उर्स होता है

उसकी कुर्बानी की याद में…!!!!!

 

© मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग

संपर्क – बिलासपुर (छ ग) मो नं 8319743682

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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