प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे

☆ दोहे नये साल के ☆ प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे ☆

☆

नये साल के पल नवल, खुशहाली है आज।

मंगलमय यह दौर है, चहके ख़ूब समाज।।

* 

नई चल रही है हवा, खुशबू के नव रंग।

आज निराशा से करे, नव आशा तो जंग।।

 *

सूरज की तैयारियाँ, नया लिया संकल्प।

देखो अब अवसाद का, काल बहुत ही अल्प।।

 *

नग़मे अधरों पर नये, नया बज रहा साज़।

हैं उमंग में आज सब,  खुशियांँ हैं सरताज।।

 *

नई चेतना दे रही, जग को नव आनंद।

मस्ती में अब झूमता, नर-नारी का वृंद।।

 *

मायूसी रोने लगी, उल्लासित मुस्कान।

नया आज परिवेश है, मिला समय को मान।।

 *

आज नया संघर्ष है, आज नवल है जोश।

उम्मीदों के दौर में, लक्ष्य आज आगोश।।

 *

अर्जुन ने ली है शपथ, धारित नया कमान।

नया तीर है शक्तिमय, होगा नव संधान।।

 *

धूप सुनहरी है निकट, सिद्ध आज दिनमान।

सकल विश्व की गति नवल, हर कोई बलवान।।

 *

नये साल का आवरण, नव होने की बात।

समय बा़ँटता बेहिचक, जन-जन को सौगात।।

 ☆

© प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे

प्राचार्य, शासकीय महिला स्नातक महाविद्यालय, मंडला, मप्र -481661

(मो.9425484382)

ईमेल – khare.sharadnarayan@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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