आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  – गीत – नया साल बन सके पुरोहित।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २६१ ☆

☆ गीत – नया साल बन सके पुरोहित ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

☆

नया साल बन सके पुरोहित

साँसों को यजमान बनाए

हास दे सके अधर अधर को

उल्लासों के सुमन खिलाए

.

खिलखिल खिल मन नलिनी शतदल

दे नीलिमा छत्र सिर पर धर

लाल लालिमा जवाकुसुम की

सके श्यामता ‘मावस की हर

शरत्पूर्णिमा की रजनीशी

चटक चाँदनी गले लगाए

नया साल बन सके पुरोहित

साँसों को यजमान बनाए

.

नव आशा ले करें अर्चना

श्रम-सीकर अँजुरी में भरकर

सफल साधना स्नेह सुवासित

पुष्पा दे जीवन सुगंध भर

किरण करों से भुवन भास्कर

सुख-समृद्धि हित यज्ञ कराए

नया साल बन सके पुरोहित

साँसों को यजमान बनाए

.

जग-जीवन की सुखकर सुषमा

दसों दिशा राजीव खिलाए

राज बहादुर करे धरा को

शांति निकेतन कर हर्षाए

विहँस जीव संजीव हो सके

हो प्रबुद्ध बुद्ध हो पाए

नया साल हो सके पुरोहित

साँसों को यजमान बनाए

☆

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

१.१.२०२६

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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