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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🙏 💐 वरिष्ठ कथाकार डॉ. कुँवर प्रेमिल जी अनंत में विलीन – विनम्र श्रद्धांजलि 💐🙏

जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर के वरिष्ठतम साहित्यकार डॉ कुंवर प्रेमिल जी, विगत 50 वर्षों से अधिक समय से लघुकथा, कहानी, व्यंग्य में लेखन। क्षितिज लघुकथा रत्न सम्मान 2023 से सम्मानित। 500 से अधिक लघुकथाएं रचित एवं बारह पुस्तकें प्रकाशित। 2009 से प्रतिनिधि लघुकथाएं (वार्षिक) का सम्पादन एवं ककुभ पत्रिका प्रकाशित और संपादित । लघु कथा को लेकर कई  प्रयोग किये।  आपकी लघुकथा ‘पूर्वाभ्यास’ को उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, जलगांव के द्वितीय वर्ष स्नातक पाठ्यक्रम सत्र 2019-20 में सम्मिलित। वरिष्ठतम  साहित्यकारों  की पीढ़ी ने  उम्र के इस पड़ाव पर आने तक जीवन की कई  सामाजिक समस्याओं से स्वयं की पीढ़ी  एवं आने वाली पीढ़ियों को बचाकर वर्तमान तक का लम्बा सफर तय किया है, जो कदाचित उनकी रचनाओं में झलकता है। हम लोग इस पीढ़ी का आशीर्वाद पाकर कृतज्ञ हैं। उनसे मेरी अंतिम आत्मीय भेंट उनके घर पर आदरणीय श्री जय प्रकाश पाण्डेय जी के साथ हुई थी। उनकी स्मृति और अक्सर फोन पर आत्मीय बातचीत भूल पाना असंभव है।  

प्रतिष्ठित कथाकार/लघुकथाकार डॉ. कुँवर प्रेमिलजी का दिनांक 05  सितंबर 2024 को रात्रि 9.30 बजे निधन हो गया।

(डॉ कुँवर प्रेमिल जी द्वारा अंतिम प्रेषित उनकी स्वर्गीय धर्मपत्नी जी को समर्पित दो लघुकथाएं  ((1) पानी कठौता भर लेई आवा (2) पत्नी के गुजर जाने के बाद .)जिन्हें वे उनकी धर्मपत्नि जी की तेरहवीं पर प्रकाशित करना चाहते थे, उन्हें ई-अभिव्यक्ति में 27 अगस्त 2024 को सादर प्रकाशित की गईं। आज हम उनकी उपरोक्त लघुकथाएं आपके लिए पुनः प्रकाशित कर रहे हैं। 🙏)

  – हेमन्त बावनकर, पुणे  

जबलपुर के श्री अशोक श्रीवास्तव जी के शब्दों में

जबलपुर के एकमात्र लघुकथा को लिखने पढ़ने ओढ़ने बिछाने वाले, लघुकथा अभिव्यक्ति के आधार स्तम्भ, प्रतिनिधि लघुकथाओं के सर्जक, सम्पादक, ककुभ लघुकथा के संपादक, आज पंच तत्वों में विलीन हो गए।

जिंदगी कितनी भी लंबी क्यों न हो, लेकिन मौत एक पल में उसे लघुकथा बना देती है, हैं को थे में बदलकर।

कुंवर प्रेमिल जी एक व्यक्तित्व ही नही लघुकथा की एक संस्था ही थे। लघुकथा के लिए उनका योगदान, समर्पण किसी पूजा से कम नहीं था।

उनका पत्नी के विछोह के दुख में 20 दिनों के भीतर ही चले जाना उनके गहरे प्रेम और संवेदना का उदाहरण बन गया है।

भगवान से यही प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को अपनी शरण में ले और बेटे बेटी और नाती पोतों को लगातार दादी दादा, नानी नाना आशा जी और कुँवर प्रेमिल जी (कुंवरपाल सिंह भाटी जी) के विछोह के आघात को सहने की क्षमता प्रदान करें।

मेरे पास सांत्वना देने के लिए कोई शब्द नहीं मिल पा रहे हैं, शब्द मौन हो चुके हैं प्रेमिल जी। 

🙏 ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से डॉ कुँवर प्रेमिल जी को विनम्र श्रद्धांजलि 🙏

 ≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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