श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “हथेली और तलवा।)

?अभी अभी # ८६६ ⇒ आलेख – हथेली और तलवा ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

हाथ और पांव हमारे शरीर के दो महत्वपूर्ण अंग हैं। किसी से दो दो हाथ करने के लिए अगर ईश्वर ने हमको दो हाथ दिए है, तो दो कदम चलने के लिए दो पांव भी दिए हैं।

हाथ की पांचों उंगलियों के बीच कोमल, नरम गद्दे सी हथेली स्थित है। जब भी हमारी मुट्ठी बंधती है, हमारी हथेली गर्म हो जाती है। कहा भी तो गया है, बंद मुट्ठी लाख की। वैसे भी मुट्ठी भर पैसे के लिए, जो हाथ का ही मैल है, किसी के आगे हाथ पसारना कहां की समझदारी है। ।

तलवा भी हथेली ही की तरह पांव के पंजों और एड़ियों के बीच सुरक्षित है। तलवा, पांव का सबसे कोमल स्थान है, हथेली की तरह नर्म, गर्म, और कोमल। पूरे शरीर का बोझ पांव के पंजे और एड़ियों पर ही होता है, तलवों को बड़े आराम से रखा जाता है। एड़ियां रगड़ी जाती हैं, तब जाकर काम चलता है। लोगों की एड़ियां ही फटती हैं, तलवे बड़े सुरक्षित रहते हैं।

हथेली और तलवे अपना अपना नसीब लिखाकर लाए हैं ! हथेलियां चूमी जाती हैं, और तलवे चाटे जाते हैं। हम जिसे हथेली पर रखते हैं, उसकी हथेली को प्यार से चूम भी सकते हैं। लेकिन जान हथेली पर कैसे रखी जाती है, यह एक अनबूझ पहेली है।

मैंने लोगों को हथेलियों को चूमते तो देखा है, लेकिन किसी को तलवे चाटते नहीं देखा। बच्चों की प्यारी प्यारी हथेली अक्सर मुट्ठी में बंद रहती है। कहते हैं, बच्चों की मुट्ठी में उनकी तकदीर लिखी होती है। हम जब किसी को अपना हाथ दिखाते हैं, तो वह हमारे हाथ की लकीरें पढ़कर हमारा भविष्य बताता है। ये सारी लकीरें हथेली में ही तो होती है। हथेली, हाथ ही का तो अंग है। ।

हथेली को पाम palm भी कहते हैं, और हस्त रेखा विज्ञान को पामिस्ट्री। हथेली पर पर्वत भी होते हैं, जी हां इन्हें मांउटस कहते हैं। मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और चन्द्र सब यहीं विराजमान होते हैं। हथेली और तलवों पर एक्यूप्रेशर चिकित्सा भी की जाती है। विभिन्न प्रेशर पॉइंट्स को दबाकर रोगों की चिकित्सा ही एक्यूप्रेशर है।

हथेली पर सरसों नहीं जमता, यहां तक तो ठीक है। लेकिन ख़ोपरे का जमा हुआ तेल हथेली की नर्मी और गर्मी से पिघल अवश्य जाता है। इंसान कितना भी कठोर हो, पत्थर दिल हो, उसकी हथेली और तलवे कोमल ही होंगे। ।

बच्चों की नाज़ुक हथेली को अपने हाथ में ले, जब चट्टी, मट्टी खेली जाती है, तो बच्चों का खिलखिलाना शरीर और मन की पूरी थकान दूर कर देता है। उसके कोमल कोमल तलवों पर जब गुदगुदी की जाती है, घोड़ा आया, घोड़ा आया, सुनकर जब वह खुलकर हंसता है, तब एक ऐसी आध्यात्मिक अनुभूति होती है, मानो हमारे साथ साक्षात बाल गोपाल क्रीड़ा कर रहे हों।

गुदगुदी हर उम्र में होती है, कभी मन में, कभी तन में। रात को सोते वक्त अपने तलवों की मालिश करके सोएं, नींद अच्छी आएगी। प्रातःकाल उठते ही अपनी हथेलियों को आपस में रगड़ें, गर्म गर्म हाथों को आंखों पर रखें, बड़ा सुकून मिलेगा। ।

कराग्रे वसते लक्ष्मीः, करमध्ये सरस्वती।

करमूले तु गोविन्दः, प्रभाते करदर्शनम्॥

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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