श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय आलेख ‘थोड़ा विचार कीजिए ना…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # ९१ ☆ आलेख – थोड़ा विचार कीजिए ना…☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
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अभी हाल ही में, इंदौर में प्रदूषित पानी सप्लाई होने से अनेक मौतें हो गई. अनेक लोग बीमार हो गए, अनेकों जगह अभी भी प्रदूषित पानी की सप्लाई जारी है. लोगों को पानी ही नहीं मिल रहा है. हम कोसने लगते हैं सिस्टम को. जब समाज में भ्रष्टाचार होता है, तो, कोसने लगते हैं, समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को. स्वास्थ्य सेवाओं में कमियां है, कि अनेक शहरों से बीमार को बड़े शहरों के लिए रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि शहरों में स्वास्थ्य की अच्छी सेवाएं उपलब्ध नहीं है.
हम कोसते हैं, हमारी शिक्षा प्रणाली को, हमारे बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जाते हैं. अच्छे जॉब के लिए विदेश जाते हैं. क्यों? क्यों हम उन्हें अपने देश में अच्छी शिक्षा और अच्छा जॉब मुहैया नहीं कर सकते? शिक्षा विभाग में पहले भ्रष्टाचार को क्यों कोसते हैं? अरे हमें वही मिला है, जो हमने चाहा था हमने कभी अपने बच्चों के लिए, अच्छी शिक्षा नहीं चाही. अपने लिए कभी अच्छा स्वास्थ्य नहीं मांगा. हमने कभी स्वच्छ पानी अपने लिए नहीं चाहा, क्योंकि हम आदी हो गए बोतल बंद पानी पीने के. इसमें कितनी मात्रा में प्रिजर्वेटिव मिला रहता है, नहीं मालूम, हमारे लिए कितना नुकसानदायक है, हमें कोई चिंता नहीं है. क्योंकि हमारे पास बोतल बंद पानी है, हम बहुत खुश हो जाते हैं, प्लास्टिक की बोतलों के ढेर लगा देते हैं जो नष्ट नहीं होता, हमने जल का संरक्षण नहीं किया,हमारे तालाब, हमारी नदियां, प्रदूषित हो गईं, वायु में प्रदूषण है, हम कोसने लगते हैं कि वायु में प्रदूषण हो गया, अरे हमने स्वच्छ वातावरण के कल्पना ही कब की है. हमने चाहा ही नहीं, कि हम एक स्वच्छ वातावरण में, स्वच्छ पानी पीकर, अच्छी शिक्षा प्राप्त कर, अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना करें. हमने जो चाहा हमें मिल गया, हमारी चुनाव प्रणाली जिससे हम अपने नेता तय करते हैं, हम धर्म और जाति के आधार पर चुनते हैं. कितने नेताओं ने अपनी जाति का भला किया है. हमने उनकी योग्यता के आधार पर कभी उनका चुनाव ही नहीं किया, तो जैसा हम चाहते हैं वैसा हमें मिलता है फिर हम किसी को क्यों कोसते हैं.
थोड़ा विचार कीजिए ना…
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
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