श्री यशोवर्धन पाठक
सुप्रसिद्ध साहित्य साधिका – श्रीमती गायत्री तिवारी जी
श्री यशोवर्धन पाठक ☆
सुप्रसिद्ध महिला साहित्यकार श्रीमती गायत्री तिवारी जी की पुण्य तिथि पर प्रति वर्ष के अनुसार इस वर्ष भी आज 27 दिसम्बर को कला वीथिका भवन में उनकी स्मृति में एक वृहद कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
श्रीमती गायत्री तिवारी जी का समाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में एक आदर्श शिक्षिका के रुप में उन्होंने अपने कर्तव्यों और दायित्वों का निष्ठा पूर्वक निर्वाह किया तो सामाजिक गतिविधियों में भी उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें मान सम्मान से महिमा मंडित किया।
जबलपुर में हिन्दी साहित्य के विकास में महिला साहित्यकारों की सक्रिय भूमिका रही है। गद्य हो या पद्य सभी में यहाँ की महिला साहित्यकारों ने संस्कारधानी को राष्ट्रीय क्षितिज पर गौरवान्वित किया है। जबलपुर के साहित्यिक जगत को अपनी लेखनी से गौरवान्वित करने में श्रीमती गायत्री तिवारी जी ने भी सृजन धर्म का सक्रियता पूर्वक निर्वाह किया था। गद्य और पद्य दोनों में ही उन्होंने अपनी कलम चलाई और साहित्यिक क्षेत्र को उल्लेखनीय और पठनीय रचनाएँ दी। । उन्होंने जहाँ प्रभावी और उद्देश्य परक कहानियों की रचना की वहीं उन्होंने भावनात्मक रूप से कविताओं का भी सृजन किया। उनका लिखा उपन्यास कोबरा मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग से पुरस्कृत और सम्मानित भी किया जा चुका है। जबलपुर और प्रदेश की साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाओं के विकास के लिए श्रीमती गायत्री तिवारी जी ने समर्पित भाव से महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई और त्रिवेणी परिषद और महिला लेखिका संघ के विभिन्न पदों पर कार्य करते हु साहित्यिक क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के लिए प्रशंसनीय प्रयास किये। साहित्य और पत्रकारिता क्षेत्र के सशक्त हस्ताक्षर के रुप में सर्वत्र प्रतिष्ठित श्रद्धेय डा राजकुमार जी सुमित्र की सफलता और सक्रियता के पीछे उनकी जीवन संगिनी श्रीमती गायत्री तिवारी जी का सराहनीय योगदान था। अपनी साहित्य साधना , शिक्षकीय जीवन और पारिवारिक गतिविधियों के साथ सुमित्र जी के जीवन में प्रत्येक सुख और दुख की साथी के रुप में उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया और यही कारण था कि सुमित्र जी ने अपने साहित्यिक और सामाजिक जीवन में एक प्रेरणा दायक और उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित किया।
साहित्य साधक श्री राजेश पाठक प्रवीण ने कथा कृति कोबरा में श्रीमती गायत्री तिवारी के पारिवारिक, सामाजिक और शैक्षणिक जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उनके साहित्य सृजन का विश्लेषण कुछ इस प्रकार किया है-
प्रातः सूरज के अर्घ्य से दिन को प्रणाम करते हुए, गृहस्थी के श्रृंगार के साथ शिक्षण कर्म में संलग्न श्रीमती गायत्री तिवारी ने हर सांझ तुलसी पर दिया रखकर घर के आंगन को प्रकाशित किया है।
तमस और चांदनी के नैरन्तर्य को कर्म और विश्वास के बोध के साथ जीवन की इबारत रचने वाली कथा लेखिका का सृजन जीवन का तत्व दर्शन है।
नारी जीवन के अंधेरे उजालों के मध्य दरकते मनके व्याकरण को कथाकार ने अपनी कहानियों के माध्यम से आलोक दिया है। कोबरा की कहानियां जीवन चेतना को व्यंजित करने वाली श्रेष्ठ कहानियां हैं।
आज श्रीमती गायत्री तिवारी जी हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी स्मृतियां हमारे मानस पटल पर सदा अमिट रहेंगी। कविवर श्री जयशंकर प्रसाद की ये प्रेरक काव्य पंक्तियां शायद ऐसी ही नारी शक्ति के लिए लिखी गई है –
नारी तुम केवल श्रद्धा हो
विश्वास रजत नग पग तल में
पीयूष स्त्रोत सी बहा करो
जीवन के सुन्दर समतल में
शत शत नमन🙏
© श्री यशोवर्धन पाठक
पूर्व प्राचार्य, राज्य सहकारी प्रशिक्षण संस्थान, जबलपुर
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈







बेहतरीन अभिव्यक्ति मां को शत शत नमन