मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग
कविता – मुझे कुछ कहना है…
मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग ☆
मुझे तेज़ उजाले से बहुत ख़ौफ़ रहा है
ये आंखें चौधिंया कर
बड़ा खेल, खेल जाते हैं
अंधेरे में सरक कर आती धीमी रोशनी
हालात को संभालने का अवसर देती है
यही आरोहण दिल मोह लेता है
मुझे इसका दर्शन पसंद है
अंधेरे और धीमी रोशनी
जीवन को समझने का धैर्य देती है
अंधेरे में पलकर
शनैः शनैः विकसित हुए पौधे भी
कभी आसमानी ऊंचाईयां छू लेते हैं
तेज उजालो ,मुझे नहीं चाहिए
सत्य को छिटकती तुम्हारी तीव्रता
मुझे आहिस्ता आहिस्ता
ज़िंदगी जीने का सलीका सीखने दो
तुम अपनी दिशाओं को उस ओर मोड़ दो
जिन्हें एक घूंट में तृप्ति की लालसा हो
बस तुम उधर रुख़ कर लो
तुम उधर का रुख कर लो…!!!!!
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© मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग
संपर्क – बिलासपुर (छ ग) मो नं 8319743682
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





