सुश्री सुषमा व्यास ‘राजनिधि’
☆ पुस्तक चर्चा ☆ शुभ मुहूर्त (लघुकथा संग्रह) – श्री देवेन्द्रसिंह सिसोदिया ☆ सुश्री सुषमा व्यास ‘राजनिधि’ ☆
पुस्तक – शुभ मुहूर्त (लघुकथा संग्रह)
लेखक – श्री देवेन्द्रसिंह सिसोदिया
प्रकाशक – बोधि प्रकाशन, जयपुर
पृष्ठ संख्या – 116
मूल्य – रु 249
शुभ मुहूर्त के कुंभ में जीवन गंगा के रूप—- समसामयिक हिंदी साहित्य जगत में लघुकथा तेजी से उभरती हुई परिलक्षित होती है। वामनावतार की तरहा यह साहित्य के ब्रम्हांड को नाप चुकी है। अपनी प्रभावी अभिव्यक्ती, सूक्ष्म दृष्टि और गंभीर सोच के कारण लघुकथा एक महत्वपूर्ण विधा के रूप में पहचानी जाने लगी है। लघु होते हुए भी उसके कथ्य चिंतन, मनन और गहन सोच के प्रश्नोत्तर छोड़ जाते हैं। हर वर्ग के पाठकों में लघुकथा साहित्य की प्रसिद्ध विधा है, अतः अनेक लघुकथाकार निरंतर लघुकथा लेखन से हिंदी साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं। उन्ही में से एक लघुकथाकार हैं– देवेंद्र सिंह सिसौदिया। देवेन्द्र सिंह सिसौदिया लम्बे अंतराल से लघुकथा लेखन कर रहे हैं। उनके लघुकथा संग्रह ‘शुभ मुहूर्त’ ने साहित्य जगत में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। संग्रह में कुल 82 लघु कथाएं हैं। ‘शुभ मुहूर्त’ लघुकथा संग्रह एक कुंभ की तरह है, जिसमें आसपास से गुजरती जीवन गंगा की संवेदनाओं का जल छलकता हुआ दिखलाई पड़ता है। वर्तमान समय की विसंगतियों, पारिवारिक समस्याओं, मानवीय मूल्यों को लेखक ने बखूबी अपनी लघुकथाओं में उकेरने का प्रयास किया है, सिर्फ प्रयास ही नहीं किया वरन समाधान की दिशा की ओर प्रस्थान भी किया है। संग्रह का शीर्षक ‘शुभ मुहूर्त’ प्रथम लघुकथा भी है, जिसमें पिता और बेटी के स्नेह, प्रेम और ममता का रूप दिखाई पड़ता है। जिसमें पाठक भी डूबने उतरने लगते हैं। बेहद ही सुंदर और मनभावन सी लघुकथा है। यह एक संदेश भी छोड़ जाती है कि प्रेम और स्नेह से दी हुई वस्तुओं के लिए कोई शुभ मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं है। लेखक एक व्यंग्यकार भी हैं अतः उनकी लघु कथाओं में मारक क्षमता ठसक के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है। लघु कथा ‘छांव’ इसका सशक्त उदाहरण है– मदरसे में बैठे बच्चे मंदिर की गुंबद की छांव में राहत पाते हैं। इसी तरहा ‘आतिशबाजी’ लघुकथा में नेताजी पर पटाखे फोड़ने का प्रकरण है और उनके छूटने पर जोरदार आतिशबाजी की जाती है। ‘आत्मीय उद्बोधन’, ‘विकास’, ‘प्रदर्शन’, ‘समाज सेवा’, ‘गरिमा’, ‘वापसी’, ‘घोषणा- पत्र’, इन सभी लघुकथाओं में मार्मिक संवाद है, व्यंग्य की प्रहार क्षमता है और मनोविश्लेषण है जो पाठकों को प्रभावित कर सकता है। भाषा में सरलता है, साथ ही सघन संकेतिकता भी है जो पाठकों का ध्यान आकर्षित करती है। शास्त्रीय संगीत के सधे हुए सुर की तरह संग्रह में शब्द और शिल्प की कसावट ‘बड़ी लड़कियों’ और ‘दादू’ लघुकथाओं में दिखाई पड़ती है। साथ ही यह लघुकथाएं संस्कार और आधुनिक जीवन के तालमेल को भी बेहतर ढंग से प्रतिपादित करती है। संक्षिप्त सरल और मार्मिक लघुकथाएं संग्रह की विशेषता है। संग्रह के अध्ययन, विश्लेषण और उनके गुणवत्ता से जब हम परिचित होते हैं तो यह संग्रह तकनीकी और कलात्मक रूप से समृद्ध दृष्टिगत होता है। लघुकथाओं में काल, स्थान और कार्य एक साथ पिरोए गए हैं। संग्रह में भाषा, शब्द विन्यास और कथ्य की त्रिवेणी में जीवन के सत्य को उभरता और चमकता देख सकते हैं। विषय के मूल स्वर को गहराई से लेखक ने पकड़ा है तथा स्थूल में से सूक्ष्म और सार्थक ढूंढ कर लघुकथाओं की रचना की है। ‘लाल डब्बा’, ‘टाइम मैनेजमेंट’, ‘अदना आदमी’, ‘प्यारी दादी’, ‘लाला’ ऐसी ही लघुकथाएं हैं।
जैसे सुई में धागा पिरोया जाता है, वैसे ही लघुकथाओं में जीवन की सूक्ष्म संवेदनाओं और भावों को पकड़ कर शब्दों में पिरोया गया है। लघुकथाकार ने अपने कलात्मक पक्ष को बहुत सशक्त रूप से पाठकों के सम्मुख रखा है। भावों को कम शब्दों में सरलता से ढालकर मन की बात मन तक पहुंचाई है। संवेदनाओं का खूबसूरत प्रस्तुतीकरण संग्रह में विचरता दिखाई पड़ता है। ‘मां-बाप’, ‘बंटवारा’, ‘बेटी’, ‘गड़गड़ाहट’, ‘मां के हाथ का’, ‘वृद्धाश्रम’, ‘संदेश’, ‘पुराना लोटा’, ‘मन की बात’, ‘नेकी की दीवार’ ऐसी लघुकथाएं हैं, जो भावनाओं से भरपूर संवेदनात्मक तो है ही साथ ही सकारात्मक भी है, जिसे पढ़कर एक सुख, एक सुकून और हल्की सी मुस्कुराहट चेहरे पर आ जाती है।
‘ब्रेकअप’, ‘पॉजिटिव रिपोर्ट’, ‘शर्ट’, ‘कैलकुलेटर’, ‘राष्ट्रभाषा’, ‘हिंदी’, ‘अपनी माटी अपनी बोली’, ‘सहयोग राशि’, ‘नई बहू’ ऐसी लघुकथाएं हैं, जिनमें जीवन मूल्यों, मानवीय रिश्तों और आत्माभिव्यक्ति की नई राह दिखाई पड़ती है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि लेखक ने अपने संग्रह ‘शुभ मुहुर्त में नए प्रयोगात्मक लेखन को महत्व दिया है। गंभीर और प्रभावी लेखनी से उत्सुकता जगाते हुए अनेक प्रश्नों को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है तथा सतत आंकलन और बौद्धिक पर चर्चा के लिए भी स्थान छोड़ा है।
© सुश्री सुषमा व्यास ‘राजनिधि’
इदौर मध्यप्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





