श्री यशोवर्धन पाठक
☆ यशोवर्धन की पुस्तक चर्चा ☆
☆ “यादों का बक्सा…” – लेखक… श्री आलोक श्रीवास्तव धीरज ☆ चर्चा – श्री यशोवर्धन पाठक ☆
पुस्तक चर्चा
पुस्तक – यादों का बक्सा
लेखक – श्री आलोक श्रीवास्तव धीरज
प्रकाशक – पाथेय प्रकाशन
☆ यादों का बक्सा – माडल स्कूल की गौरवगाथा का ऐतिहासिक दस्तावेज श्री आलोक श्रीवास्तव धीरज का–श्री यशोवर्धन पाठक ☆
मध्यप्रदेश की संस्कारधानी में स्थित शासकीय माडल स्कूल का एक गौरवशाली इतिहास रहा है और अगर आप अपने मन में इस अखिल भारतीय ख्याति प्राप्त लब्ध- प्रतिष्ठ शिक्षा संस्थान के स्वर्णिम काल की मनोहर झांकी से रूबरू होने की उत्कट अभिलाषा रखते हैं तो आपको मध्यप्रदेश सरकार में अपर कलेक्टर के पद से सेवानिवृत्त श्री आलोक श्रीवास्तव धीरज की हाल में ही प्रकाशित किताब यादों का बक्सा का आद्योपांत पारायण करना चाहिए। श्री आलोक श्रीवास्तव माडल स्कूल के भूतपूर्व छात्र हैं और हम दोनों ने एक साथ माडल स्कूल से हायर सेकंडरी स्कूल परीक्षा उत्तीर्ण की थी। श्री श्रीवास्तव की यह कृति दर असल माडल स्कूल का ऐसा यश अर्चन ग्रंथ है जो शिक्षा जगत की हर लायब्रेरी का अनिवार्य हिस्सा बनने में समर्थ है। आलोक जी ने विगत दिनों अपना यह बहुमूल्य ग्रंथ मुझे भेंट किया था जिसे पढ़कर मेरे मानस पटल पर अंकित अपने छात्र जीवन की मधुर स्मृतियां जीवंत हो उठीं। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि उनका यह ग्रंथ एक ऐसा संग्रहणीय दस्तावेज है जिसे माडल स्कूल के हर छात्र को अपने पास भली-भांति सहेजकर रखना चाहिए। ‘यादों का बक्सा’ को खूबसूरत बनाने के लिए श्री श्रीवास्तव ने जो कठिन साधना की है उसके लिए वे असीम प्रशंसा और साधुवाद के हकदार हैं।
भाई आलोक श्रीवास्तव ने अपने इस बेशकीमती ग्रंथ में माडल स्कूल की स्थापना से लेकर अब तक की सारी दुर्लभ जानकारी प्रस्तुत करने की ईमानदार कोशिश की है और अपनी इस कोशिश में वे पूर्णतः सफल हुए हैं। इस अर्थ में इसे अगर एक बहुमूल्य ऐतिहासिक दस्तावेज कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। देश विदेश में माडल स्कूल का नाम रोशन करने वाले अनेक भूतपूर्व छात्रों के संस्मरणात्मक लेख इस ग्रंथ में प्रमुखता से प्रकाशित किए गए हैं जो माडल स्कूल के सभी स्वनामधन्य भूतपूर्व प्राचार्यों सहित समस्त गुरुजनों के श्रद्धापूर्वक यश अर्चन की भावना से प्रेरित हैं। ‘यादों का बक्सा ‘ में प्रमुखता से प्रकाशित अपने लेख में शाला के भूतपूर्व छात्र और मप्र शासन के जनसंपर्क विभाग में अपर संचालक के पद से सेवानिवृत्त श्री हर्षवर्धन पाठक कहते हैं कि “जिन शासकीय शिक्षा संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करना अथवा शिक्षण कार्य करना सम्मान और प्रतिष्ठा की बात समझी जाती थी उनमें माडल हाई स्कूल का नाम अग्रणी पंक्ति में था। इस विश्वास को कीर्ति तथा उपलब्धियों के शिखर तक पहुंचाने वाले मनस्वी शिक्षाविदों में स्वर्गीय शिव प्रसाद निगम प्रमुख थे। ” श्री पाठक के अनुसार स्वर्गीय श्री निगम ने लगभग डेढ़ दशक तक इस प्रतिष्ठित विद्यालय की कमान संभाली और वह समय इस शिक्षण संस्थान का ‘स्वर्णकाल’ कहा जा सकता है। मध्यप्रदेश शासन के लोक शिक्षण विभाग के संचालक पद से सेवानिवृत्त श्री श्यामानुज प्रसाद वर्मा अपने संस्मरणात्मक लेख में माडल हाई स्कूल की गौरवगाथा का सजीव चित्रण करते हुए कहते हैं ” मेरे जीवन में जो भी सफलता प्राप्त हुई है उसमें माडल स्कूल का बड़ा योगदान है। जब कभी कालेज में शिक्षक मेरी किसी सफलता पर प्रश्न पूछते थे कि किस स्कूल से आए हो तो मैं सगर्व उत्तर देता था कि जबलपुर के माडल हाई स्कूल से। ” इसमें दो राय नहीं हो सकती कि माडल हाई स्कूल ने अपने हजारों भूतपूर्व छात्रों को देश विदेश में गर्व के साथ यह कहने का सौभाग्य प्रदान किया है कि उन्होंने जबलपुर के माडल हाई स्कूल से विद्यालयीन शिक्षा प्राप्त की है।
”यादों का बक्सा ” का आद्योपांत पारायण करने के पश्चात् ही आप यह जान पायेंगे कि 1904 में सीमित संसाधनों के साथ जिस माडल स्कूल की नींव रखी गई थी वह अपनी प्रगति यात्रा में कितने महत्वपूर्ण पड़ाव तय करते हुए कालांतर में देश के सुप्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों की अग्रणी पंक्ति में विशिष्ट स्थान अर्जित करने का हकदार बना। ” यादों का बक्सा” में प्रकाशित, माडल हाई स्कूल के संस्थापक पं. लज्जा शंकर झा का हस्तलिखित पत्र माडल स्कूल की स्थापना से लेकर स्वर्गीय श्री शिव प्रसाद निगम के प्राचार्य काल तक की प्रगति यात्रा का प्रामाणिक दस्तावेज है। निःसंदेह इस पत्र ने ” यादों का बक्सा ” की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए हैं और सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार एवं गोविंद राम सेक्सरिया अर्थ वाणिज्य महाविद्यालय जबलपुर के पूर्व प्राचार्य डॉ कुन्दन सिंह परिहार ने इस अनमोल ग्रंथ के प्रकाशन पर हर्ष व्यक्त करते हुए अपनी सम्मति में लिखा है ” मुझे खुशी है कि संस्था के पूर्व छात्र श्री आलोक श्रीवास्तव ने शाला के प्रति अपने ऋण के शोधन के लिए यह पुस्तक लिखने का निर्णय लिया। ” मैं उनके कथन से पूर्णतः सहमत हूं परन्त मैं यह भी मानता हूं कि माडल स्कूल के ऋण शोधन की भावना से किया गया बड़े से बड़ा कार्य भी भूतपूर्व छात्रों को माडल स्कूल के ऋण से उऋण नहीं कर सकता। जैसा कि डॉ परिहार कहते हैं कि इस संस्था के प्रति कृतज्ञता महसूस करना उसके पूर्व छात्रों के लिए स्वाभाविक है। सही अर्थों में ‘ यादों का बक्सा ‘ कृतज्ञता ज्ञापन का ही एक विनम्र प्रयास है जिसके लिए मैं एक बार पुनः श्री आलोक श्रीवास्तव को साधुवाद देना चाहता हूं। ” पाथेय प्रकाशन ” द्वारा प्रकाशित यह ग्रंथ शिक्षा जगत के लिए अनमोल उपहार सिद्ध होगा।
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© श्री यशोवर्धन पाठक
पूर्व प्राचार्य, राज्य सहकारी प्रशिक्षण संस्थान, जबलपुर
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






वाह बेहतरीन अभिव्यक्ति