श्री यशोवर्धन पाठक

 

☆ पुस्तक चर्चा ☆ अंतःकरण की आवाज है – सोल  वायस ☆ श्री यशोवर्धन पाठक ☆

(Soul Voice: the voice within – by Swati Varma)

हाल में ही श्रीमती स्वाति वर्मा का एक लघु काव्य संग्रह “सोल वायस” का प्रकाशन हुआ है जिसमें उनके द्वारा हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में रचित 25 उत्कृष्ट कविताएं शामिल की गई हैं। इसमें दो राय नहीं हो सकती कि अपने इस काव्य संग्रह के माध्यम से स्वाति वर्मा साहित्य जगत से अपना परिचय एक समर्थ कवियत्री के रूप में कराने में सफल हुई हैं। यद्यपि यह स्वाति वर्मा का प्रथम काव्य संग्रह है परन्तु इसमें संग्रहीत सभी रचनाएं उनके सिद्धहस्त कवियत्री होने का प्रमाण देती हैं। एक ओर जहां उनकी कुछ कविताओं में उनकी विद्वता की स्पष्ट झलक दिखाई देती है तो दूसरी ओर अंग्रेजी में लिखी उनकी कुछ कविताएं पाठकों को भावुक कर  सकती हैं। वर्तमान परिवेश को विषय वस्तु बना कर लिखी गई कविताओं को पढ़कर ऐसा प्रतीत होता है कि आज कल  के उथल-पुथल भरे माहौल ने उनके मन को  उद्वेलित किया है । स्वाति वर्मा की कविताओं से उनके अंतर्मन का आक्रोश और व्याकुलता की अनुभूति तो होती है लेकिन वे निराश नहीं हैं। उनकी  कविताएं उनके  सुधारवादी दृष्टिकोण की परिचायक हैं । सहज सरल भाषा में लिखी गई उनकी कुछ कविताओं में आप कल्पना की उड़ान नहीं देख सकते क्योंकि सीधे दिल में उतर जाने वाली ये यथार्थ के धरातल पर लिखी गई हैं यही कारण है कि स्वाति वर्मा की कविताएं पाठक  को सोचने पर मजबूर करती हैं।यही कवि की सफलता है।स्वाति वर्मा की कविताएं जहां एक ओर समाज को प्रकृति के प्रति अपने उत्तर दायित्व का अहसास कराती हैं वहीं दूसरी ओर नैतिक मूल्यों में आ रही गिरावट और सामाजिक सरोकारों की उपेक्षा से उपजी पीड़ा भी उनकी कविताओं में उजागर होती है। स्वाति वर्मा अपनी समय सापेक्ष रचनाओं के माध्यम से यह संदेश देने में सफल रही हैं कि समाज में अगर कहीं  कुछ ग़लत हो रहा है तो साहित्यकार मूकदर्शक बना नहीं रह सकता। उनकी कलम में गलत को ग़लत कहने का साहस है परन्तु वे निराशावादी नहीं हैं घने अन्धकार में भी वे उम्मीद की किरण देख ही लेती हैं –

सुनसान अंधेरों में जैसे कुछ

रोशन सितारे दिखते हैं

सफेद पोशाक पहने वैसे कुछ

गिने चुने फ़रिश्ते हैं।

अपनी एक कविता में वे समाज को यह संदेश दे रही हैं कि हमारा अतीत कितना भी सुंदर क्यों न रहा हो लेकिन हमारे पास केवल हमारा वर्तमान है उसे ही हमें सुंदर बनाना है –

एक बस आज है हमारे पास,

चल इस आज को खास बनाते हैं।

कवि का मानना है कि यदि  मनुष्य के अंदर मिट्टी का कर्ज चुकाने की भावना समाप्त हो जाए तो इससे बड़ी कृतघ्नता और कोई नहीं हो सकती।” मिट्टी ” शीर्षक कविता में स्वाति वर्मा ने अपनी मन की पीड़ा को इस तरह उजागर किया है –

करती रही वो पोषण हमारा,

और हम उसमें जहर मिलाते चलें।

“हुड़दंगों का मेला” शीर्षक कविता में उन्होंने समाज विरोधी ताकतों पर तीखा प्रहार किया है-

हुड़दंगों का मेला लगा है,

सबके हुड़दंग की एक एक दुकान।

“मेरा नटखट लाल” शीर्षक कविता वात्सल्य रस से सराबोर सराहनीय रचना है।

स्वाति वर्मा ने अंग्रेजी में भी काफी कविताएं लिखीं हैं । उनमें से कुछ चुनिंदा कविताओं को इस काव्य संग्रह में शामिल किया गया है जो इस बात का प्रमाण हैं कि उन्हें अंग्रेजी भाषा में भी अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति में प्रभावी अभिव्यक्ति में हासिल है। स्वाति वर्मा ने “Love is” शीर्षक कविता में प्रेम को जिन उपमानों के  माध्यम से परिभाषित किया है वे सर्वथा उपयुक्त हैं-

A Mountain of feelings,

An Ocean of emotions,

A River of excitement,

The Tree of commitment.

स्वाति वर्मा ने अपने इस काव्य संग्रह में अपनी जिन अंग्रेजी कविताओं को शामिल नहीं किया है उन्हें पढ़कर ऐसा प्रतीत है कि उन्हें अपनी अंग्रेजी कविताओं का एक संकलन अलग से प्रकाशित करना चाहिए। इसमें दो राय नहीं हो सकती कि उनके पास अपने मन की उदात्त भावनाओं की मर्म स्पर्शी अभिव्यक्ति  के लिए पर्याप्त शब्द भंडार है  और  पाठकों को मंत्रमुग्ध कर देने की शैली में भावप्रवण सृजन की सामर्थ्य भी उनके अंदर मौजूद है।

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© श्री यशोवर्धन पाठक

पूर्व प्राचार्य, राज्य सहकारी प्रशिक्षण संस्थान,  जबलपुर

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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