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सुश्री निशा नंदिनी भारतीय 

 

(सुदूर उत्तर -पूर्व  भारत की प्रख्यात  लेखिका/कवियित्री सुश्री निशा नंदिनी जी  के साप्ताहिक स्तम्भ – सामाजिक चेतना की अगली कड़ी में   प्रस्तुत है  उनकी  एक  कविता  “मेरा गाँव ”। आप प्रत्येक सोमवार सुश्री  निशा नंदिनी  जी के साहित्य से रूबरू हो सकते हैं।)

 

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सामाजिक चेतना – #26 ☆

☆ कविता – मेरा गाँव  ☆

 

सूना दिल मेरा

तब आबाद हो गया

गाँव से मेरे जब कोई

संदेश आ गया।

करते थे बहुत याद

जिनको हम

यादों को उनकी

कोई आज सहला गया।

 

कुछ अजीज़ थे मेरे

नदिया पार के

उनकी यादों में

कोई नहला गया।

 

इश्क में यारों का

रूठना मनाना

आज यादों में उनकी

कोई भिगो गया।

 

हाथ फेरना बूढ़ी काकी का

सिर पर मेरे

दिला कर याद

कोई था जो अपनत्व दे गया।

 

दिन वो बचपन के

बेहद खूबसूरत थे मेरे

दिला कर अहसास

कोई दर्द में डूबो गया।

 

“निशा” फिर चाँद

निकला है छत पर मेरी

आज फिर गाँव से मेरे

कोई आ गया।

 

© निशा नंदिनी भारतीय 

तिनसुकिया, असम

9435533394

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