श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”
संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी के साप्ताहिक स्तम्भ “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “माँ देवी का रूप है…”। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।
मनोज साहित्य # १९२ – माँ देवी का रूप है… ☆
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माँ देवी का रूप है, जग की पालन हार ।
बनी रहे उसकी कृपा, मंजिल चढ़ें अपार ।।
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हर माँ को बेटा लगे, घर का राजकुमार।
इस ममता की डोर से, मिलता उसे दुलार ।।
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माँ ही बेटा पालती, समझ जिगर का लाल ।
बदले में कब चाहती, मन में नहीं मलाल ।।
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पालन कर्ता है वही, माँ ही तारन हार।
भटकों को भी राह में, ले आती है द्वार।।
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माँ बेटे को चाहती, देती सदा प्रकाश ।
बेटा माँ को भूलकर, उड़ जाता आकाश ।।
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माँ है मंगल कारणी, सदा रहे अनुकूल ।
नव जीवन की दायनी, कभी नहीं प्रतिकूल ।।
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उसके ही आशीष से, मिलता सही मुकाम ।
उसकी किरपा से मिले, खुशियों के पैगाम ।।
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वह दुर्गा के रूप में, जग की तारन हार।
ईश्वर उसकी कोख से, जन्मा है हर बार।।
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कोई भी माँ से बड़ा, जग में नहीं महान।
हम सब उसको मान दें, तभी बढ़ेगी शान।।
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© मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”
संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002
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