डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – दीवाली के दीप।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # २९७ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के दोहे – दीवाली के दीप ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

☆

बढ़ता जब अँधियार है, दीपक होता दीप्त।

समरसता सँग प्रेम का, करता भाव प्रदीप्त।।

*

द्वार-द्वार पर सज रहे, दीवाली के दीप।

चौक पुरतीं बेटियाँ आँगन गोबर लीप।।

*

दीवाली का अर्थ है,  मन में भरो उजास।

करिए शुभ की कामना, रखिए शुभ की आस।।

*

मन में हो सौहार्द यदि, लेंगे हिरदय जीत।

प्रेम भाव से भेंटिए, शत्रु बनेंगे मीत।।

*

जगमग होती हर गली, फैल रहा आलोक।

करिए ऐसी कामना, मिटें हृदय के शोक।।

☆

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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