आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  – बाल रचनाएँ: १. श्रेया रानी २. अर्णव दादा  ३. आरोही।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २५६ ☆

☆ बाल रचनाएँ: १. श्रेया रानी २. अर्णव दादा  ३. आरोही ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

☆

१. श्रेया रानी

श्रेया रानी खूब सयानी

प्यारी लगती कर नादानी

पल में हँसे, रूठती पल में

कभी लगे नानी की नानी

चाहे मम्मी कभी न टोंकें

करने दें जी भर मनमानी

लाड लड़ाती है दादी से

बब्बाजी से सुने कहानी

***

२. अर्णव दादा

अर्णव दादा गुपचुप आता

रहे शांत, सबके मन भाता

आँखों में सपने अनंत ले-

मन ही मन हँसता-मुस्काता

मम्मी झींके:’नहीं सुधरता,

कभी न खाना जी भर खाता

खेले कैरम हाथी-घोड़े,

ऊँट-वज़ीरों को लड़वाता

***

३. आरोही

धरती से निकली कोंपल सी

आरोही नन्हीं कोमल सी

अनजाने कल जैसी मोहक

हँसी मधुर, कूकी कोयल सी

उलट-पलटकर पैर पटकती

ज्यों मछली जल में चंचल सी

चाह: गोद में उठा-घुमाओ

करती निर्झर ध्वनि कलकल सी

☆

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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