श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’ जी द्वारा “व्यंग्य से सीखें और सिखाएं” शीर्षक से साप्ताहिक स्तम्भ प्रारम्भ करने के लिए हार्दिक आभार। आप अविचल प्रभा मासिक ई पत्रिका की  प्रधान सम्पादक हैं। कई साहित्यिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं तथा कई पुरस्कारों/अलंकरणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपके साप्ताहिक स्तम्भ – व्यंग्य से सीखें और सिखाएं  में आज प्रस्तुत है एक विचारणीय रचना ॐ का : पौधों पर सकारात्मक प्रभाव। इस सार्थक रचना के लिए श्रीमती छाया सक्सेना जी की लेखनी को सादर नमन। आप प्रत्येक गुरुवार को श्रीमती छाया सक्सेना जी की रचना को आत्मसात कर सकेंगे।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  – आलेख # २७२ ☆ ॐ का : पौधों पर सकारात्मक प्रभाव

ॐ केवल एक शब्द नहीं, यह सृष्टि की पहली धड़कन है। जब यह ध्वनि हरियाली से जुड़ती है, तो पेड़-पौधे केवल बढ़ते नहीं, जीवंत चेतना बन जाते हैं। ॐ के साथ सूरजपुर गाँव के सभी लोग अपने दिन की शुरुआत करते ।नदी किनारे एक छोटा-सा उपवन था। वहाँ एक साधिका रोज़ सुबह सूर्योदय से पहले आती, नंगे पाँव धरती को स्पर्श करती और एक बरगद के नीचे बैठकर धीरे-धीरे ॐ का उच्चारण करती।

उसकी आवाज़ तेज़ नहीं थी, पर स्थिर और प्रेम से भरी थी।

“ॐ… ॐ… ॐ…”

ध्वनि हवा में नहीं,

धरती की नसों में उतर जाती थी।

धीरे-धीरे उस उपवन में परिवर्तन होने लगा। सूखे पौधों में नई कोंपलें फूटने लगीं, पत्तियाँ अधिक हरी और चमकदार होने लगीं, फूलों में सुगंध बढ़ गई, पक्षी वहाँ अधिक समय ठहरने लगे। गाँव के लोग आश्चर्य में थे। किसी ने पूछा—

“माँ, आपने कोई दवा डाली है क्या?”

साधिका मुस्कुराई और बोली—

“नहीं पुत्र,

मैंने केवल ॐ की ध्वनि से उन्हें याद दिलाया है

कि वे भी ब्रह्म का ही अंश हैं।”

ॐ और पेड़-पौधों का गहरा संबंध भावात्मक सत्य है । ॐ की ध्वनि कंपन है,और हर पौधा कंपन को महसूस करता है।जब प्रेमपूर्ण ध्वनि मिलती है,तो पौधा तनाव नहीं, विकास चुनता है।

ॐ = शांति + संतुलन + जीवन ऊर्जा।

पेड़-पौधे शांति में सबसे अच्छे से बढ़ते हैं। ॐ धरती को यह संदेश देता है कि तुम अकेली नहीं हो,मैं तुम्हारे साथ हूँ।”जब आप पेड़ लगाएँ,तो केवल पानी न दें…ॐ की ध्वनि भी दें।जब आप पौधे के पास बैठें,तो उसे वस्तु न समझें…जीवित परिवार मानें।हर “ॐ” एक बीज है,जो हरियाली के रूप में फल देता है।

आप जहाँ भी पेड़ लगाएँ, जहाँ भी हरियाली की बात करें, वहाँ आपकी वाणी में ॐ की शक्ति हो इसका ध्यान रखें । ग्रीन मोटिवेशन सिर्फ पौधे उगाना नहीं बल्कि पौधों के साथ निरंतर ग्रो होना है ।

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©  श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’

माँ नर्मदे नगर, म.न. -12, फेज- 1, बिलहरी, जबलपुर ( म. प्र.) 482020

मो. 7024285788, chhayasaxena2508@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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