श्रीमती शशि सराफ

(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘अधीरता…‘।)

☆ शशि साहित्य # ८ ☆

? कविता – अधीरता…  ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ  ? ?

☆

बहारों के आने का मौसम है,

शाखों पर नई कोपलें आने को है…

 

छाएगा कई रंगों का दामन हर तरफ,

खुशबू, मदहोशी का तराना गुनगुनाने को है…

 

बन गया आसमान, सुरमई रंगों का पटल…

चांदनी, तारों भरा आंचल लहराने को है…

 

मन हो रहा बावरा, बेचैन भावना,

लगता है फिर नयी ख्वाहिश,

जन्म लेने को है…

 

बोझिल हो रही पलकें,

पर नींद है लापता…

खुली आंखों में, कोई सपना फिर सजने को है…

 

विरक्त हो रहा मन,

झमेलों से, झंझटों से…

ईश्वर ..कुछ नया लिखने को है…

 

लगता है परिपक्व होने लगी हूं मैं,

दुनिया पर कम, खुद पर भरोसा होने को है…

☆

© श्रीमती शशि सराफ

जबलपुर, मध्यप्रदेश 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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