श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’ जी द्वारा “व्यंग्य से सीखें और सिखाएं” शीर्षक से साप्ताहिक स्तम्भ प्रारम्भ करने के लिए हार्दिक आभार। आप अविचल प्रभा मासिक ई पत्रिका की प्रधान सम्पादक हैं। कई साहित्यिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं तथा कई पुरस्कारों/अलंकरणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपके साप्ताहिक स्तम्भ – व्यंग्य से सीखें और सिखाएं में आज प्रस्तुत है एक विचारणीय रचना “शक्ति, सरलता और नई चेतना का पर्व…”। इस सार्थक रचना के लिए श्रीमती छाया सक्सेना जी की लेखनी को सादर नमन। आप प्रत्येक गुरुवार को श्रीमती छाया सक्सेना जी की रचना को आत्मसात कर सकेंगे।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – कविता # २८३ ☆ शक्ति, सरलता और नई चेतना का पर्व… ☆
नवरात्रि की महाअष्टमी, माँ शक्ति की आराधना का वह पावन क्षण है, जब श्रद्धा केवल शब्द नहीं रहती, बल्कि जीवन का आधार बन जाती है। यह दिन हमें बाहरी पूजा के साथ-साथ अपने अंतर्मन में भी एक दीप जलाने की प्रेरणा देता है।
“शक्ति स्वरूपा माँ जगदम्बे” महागौरी इसी निष्कलुष भक्ति का सजीव चित्र प्रस्तुत करतीं हैं, जहाँ कोई जटिल विधि-विधान नहीं, केवल सच्चे हृदय की पुकार है—
“पूजन अर्चन कुछ नहिं जानू,
जानू तो बस प्यार…”
इन सरल शब्दों में छिपा भाव आज की पीढ़ी के लिए एक गहरा संदेश है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में जहाँ सब कुछ पाने की होड़ है, वहाँ यह भक्ति हमें ठहरना और अपने भीतर झाँकना सिखाती है। यह याद दिलाती है कि सच्ची शक्ति बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि मन की शांति, संतुलन और करुणा में निहित है।
महाअष्टमी केवल देवी पूजन का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का भी अवसर है। आज जब प्रकृति हमें संतुलन बनाए रखने का संकेत दे रही है, तब “ग्रीन सोच” को अपनाना भी हमारी जिम्मेदारी बन जाती है।
जैसे हम माँ के चरणों में पुष्प अर्पित करते हैं, वैसे ही धरती माँ के प्रति भी कृतज्ञता प्रकट करें—एक पौधा लगाकर, जल और पर्यावरण की रक्षा करके।
यह पर्व हमें सिखाता है कि भक्ति का वास्तविक स्वरूप केवल मंदिरों तक सीमित नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार, हमारी सोच और हमारे कर्मों में झलकना चाहिए।
महाअष्टमी पर यही संकल्प हो—
हम अपने भीतर की शक्ति को पहचानें, उसे सकारात्मक दिशा दें, और एक ऐसे भविष्य का निर्माण करें जहाँ भक्ति, प्रकृति और मानवता साथ-साथ आगे बढ़ें।
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© श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’
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