श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १७३ ☆ देश-परदेश – एल पी जी गैस: नई मुसीबत – भाग-१ ☆ श्री राकेश कुमार ☆
घर का चूल्हा ना जले, तो कितना बड़ा पहाड़ टूट पड़ता हैं। आप लोग अभी ये अनुभव नहीं करें होंगे। पुरानी कहावत है, जिस तन लगे वो ही तन जाने”, जिनको समझ ना आया हो तो ” it is bearer who knows where shoe pinches”
कल एक पुराने साथी का फोन आया, उसने बताया कि दस वर्ष पूर्व वो जयपुर में अपना गैस का कनेक्शन जमा करवा कर अपने गृह नगर आ गया था। अब उसको गैस बुक नहीं करने दी जा रही है। जयपुर के कनेक्शन के समय उसका आधार कार्ड लिंक किया गया था। उसको एजेंसी ने डिएक्टिवेट नहीं किया है।
मित्र ने ये भी कह दिया, यदि मेरा काम नहीं हुआ तो, वो अपने गृह नगर से हमारे यहां आ जायेगा। उसकी इस धमकी से हम भी डर गए, और तुरंत गैस एजेंसी चल पड़े।
गैस एजेंसी की दुकान से पांच सो गज़ पूर्व वाहन प्रतिबंधित थे। जिस तरफ भीड़ जा रही थी, हम भी उसका हिस्सा बन गए, अधिकतर लोग खाली सिलेंडर साथ लिए हुए थे।
हमें भी कुंभ मेले की याद आ गई, वहां जैसा मोहाल था। ऐसा लग रहा था आगे त्रिवेणी संगम हैं। सब हमसे आगे जाते हुए प्रतीत हो रहे थे। हम तो भरपेट भोजन किए हुए थे, इसलिए धीरे चल पा रहे थे। भीड़ वाले चेहरे परेशान से नज़र आ रहे थे। मानो कई दिनों से बिना भोजन किए जल्दी में थे। कुछ लोग वापिस भी आ रहे थे। खाली पेट “करो या मरो” जैसी स्थिति होती हैं। हमारे यहां भी कहा गया है, “भूखे भजन ना होई गोपाला”
अब हमें भी भूख लग रही है, आगे की जानकारी के लिए भाग 2 का इंतजार करें।
© श्री राकेश कुमार
संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)
मोबाईल 9920832096
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





