सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’

(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता !! नटखट कान्हा !!)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # १६ ☆

☆ !! नटखट कान्हा !! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆

☆

लेकर बालक माथ, पार की यमुना सारी।

नंद गाँव में आज, मना है उत्सव भारी।।

मातृ गोद की चाह, धरा पर माधव आए।

धन्य यशोदा भाग्य, नाथ को गोद खिलाए।।

* 

नटखट कान्हा रोज, गाँव में फोड़े मटकी।

देते ताना लोग, बात ये माँ को खटकी।।

लेकर रस्सी आज, बाँध मै दूंगी तुझको।

खाता माखन चोर, लाज है आती मुझको।।

* 

लेकर रस्सी हाथ, लाल को बांधे माता।

तीन लोक का नाथ, श्याम वो खेल दिखाता।।

घटती रस्सी देख, मातु को अचरज भारी।

कर के लीला बंद, खड़े थे फिर बनवारी।।

☆

© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”

झालरापाटन राजस्थान

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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