डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – बप्पा की बिदाई।)
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अनंत डोर बंधी कलाई पर
हैं विश्वास का धागा
बप्पा गणपति जा रहे
मन का वही सहारा है।
अगले बरस बप्पा आना तुम
करते दिल से पुकार।
तेरी माया है अनंत,
तेरा अनंत है प्यार।
बप्पा अनंत है, अनादि हैं,
है आप पालनहार,
आशीष आपका मिले
नहीं मानेंगे हार।
हम तो विदाई दे रहे
नहीं विसर्जन आज।
हँसी खुशी हम विदा करें
निपटे सबके हर काज।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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