सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’
(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता !! जग के आधार राम !)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # १८ ☆
☆ !! जग के आधार राम !! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆
☆
इस जग के आधार राम है, राम बसें हैं सृष्टि में ।
धूप-छांँव में नील गगन में, राम समाँए वृष्टि में।।
सूरज उनसे ऊर्जा पाकर, जग को ऊर्जा बाँटता।
देता है समरूप सभी को, कहाँ कभी वह छाँटता ।।
*
मन में राम विरोध अगर है, सत्य बोध भी चाहिए।
प्राण वायु में राम बसें हैं, रुकना प्रयोग चाहिए।।
नीर बनें वो प्यास बुझाते, जल पीना भी छोड़ दो।
धरा बने प्रभु धान लुटाते, सबसे नाता तोड़ दो।।
*
नहीं इष्ट यदि राम तुम्हारे, सरोकार क्या राम से ।
आपा खोते जयकारों से, घृणा जताते नाम से।।
मानों या फिर मत मानो सच, राम नाम में शक्ति है ।
मात्र नाम है राम अगर तो, इतनी क्यों आसक्ति है ।।
*
धर्म सभी का यही सिखाता, मानवता ही धर्म है।
जन-जन की कल्याण कामना, सबसे पावन कर्म है।।
अल्प काल का जीवन सारा, जाना है हरि धाम में।
राम अंश बनकर हम आए, मिल जाना है राम में।।
☆
© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”
झालरापाटन राजस्थान
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





