डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “मन की बात…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ४७
कविता – मन की बात… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
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जन गण के लिए मन की बात इक सौगात है
जन-जन की हुकूमत से होती सीधी बात है
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नायक सभी चौकन्ने हैं,जन-हित के वास्ते
प्रतिनिधि लोक-सेवक,जनता के साथ है
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खुशबू से महक उठा लोकतंत्र का चमन
विकास के आँगन में खिला पारिजात है
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सरकारी योजनाओं से हर रास्ते रोशन
कौन कह रहा है अब अंधेरी रात है
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सड़कों का जाल बिछ चुका,अब गाँव-गाँव में
देहात ने मिलाया शहरों से हाथ है
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भेदभाव के समस्त क्लेश मिट गये
इंसान हैं सभी,कहाँ अब जात-पाँत है ?
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रहता डरा-डरा अब,ना-पाक पड़ोसी
हिन्द की सेना बनी,अब वज्रपात है
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दुरुस्त-चुस्त शासन,मुस्तैद प्रशासन
विकसित भारत से तय,मुलाक़ात है
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अच्छे दिनों का दौर अब,आया है दोस्तो
विकास की यही तो नई शुरुआत है
=10=
‘राजेश’ विश्व गुरु है,ये देश हमारा
बलाओं-संकटों से सबको,अब निज़ात है
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
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