सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपका एक अप्रतिम गीत – सृष्टि का आधार नारी…।
रचना संसार # ११४
☆ गीत – सृष्टि का आधार नारी… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ☆
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नारी की पूजा करिए सब,
वह परमेश्वर का वरदान।
तन -मन करती सदा समर्पित,
जननी प्रज्ञा को दो मान।।
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है आधार सृष्टि की नारी,
करो सदा उसका सत्कार।
दुर्गा काली है रणचंडी,
नारी देवी का अवतार।।
रानी लक्ष्मीबाई साहस ,
पराक्रमी दुर्गा पहचान।
त्यागमूर्ति है वह करुणा की ,
बसती बच्चों में है जान।।
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जगजननी माता है नारी,
पावन गंगा की है धार।
प्रेम त्याग की वह है मूरत ,
जीवन का अनुपम शृंगार।।
नारी धरती का है गौरव,
देती सबको दुर्लभ ज्ञान।
शत- शत नमन करो नारी को,
नित करना उसका जयगान।।
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लक्ष्मी देवी नारी घर की,
नहीं रही वह अबला आज।
पुरुषों से भी वह है बढ़कर ,
उससे उन्नत लोक समाज।।
जान देशरक्षा में देतीं ,
करती रहती हैं बलिदान।
राह दिखाती है विकास की,
सत्कर्मों की लौकिक खान।।
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चीर-हरण रोको नारी का,
करते क्यों हो अत्याचार।
नारी हिंसा उत्पीड़न का,
करो सजग मन से प्रतिकार।।
उठा शस्त्र दानव को मारो,
करना स्थापित नया विधान।
चक्र सुदर्शन कृष्ण चला अब,
करो सुरक्षा और निदान।।
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© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)
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