डॉ राकेश ‘चक्र’
(हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. राकेश ‘चक्र’ जी की अब तक लगभग तेरह दर्जन से अधिक मौलिक पुस्तकें ( बाल साहित्य व प्रौढ़ साहित्य ) तथा लगभग चार दर्जन साझा – संग्रह प्रकाशित तथा कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन।लगभग चार दर्जन साझा – संग्रह प्रकाशित तथा कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन। कई कृतियां पंजाबी, उड़िया, तेलुगु, अंग्रेजी आदि भाषाओँ में अनूदित । कई सम्मान/पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा बाल साहित्य के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘बाल साहित्य श्री सम्मान’ और उत्तर प्रदेश सरकार के हिंदी संस्थान द्वारा बाल साहित्य की दीर्घकालीन सेवाओं के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘बाल साहित्य भारती’ सम्मान, अमृत लाल नागर सम्मान, बाबू श्याम सुंदर दास सम्मान तथा उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संस्थान के सर्वोच्च सम्मान सुमित्रानंदन पंत, उत्तर प्रदेश रत्न सम्मान सहित बारह दर्जन से अधिक राजकीय प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं गैर साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित एवं पुरुस्कृत।
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आप “साप्ताहिक स्तम्भ – समय चक्र” के माध्यम से उनका साहित्य प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकेंगे।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – समय चक्र – # ३१४ ☆
☆ गीत – एक रहें हम, नेक बनें हम… ☆ डॉ राकेश ‘चक्र’ ☆
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हम हिन्दू हैं, हमी आर्य हैं,
जग नव निर्माण करें।
एक रहें हम, नेक बनें हम,
सबका कल्याण करें।
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हम हिन्दू हैं, हमी आर्य हैं।
हम हिन्दू हैं, हमी आर्य हैं।
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बँटना नहीं जातियों में अब,
बँटना ही तो घातक है।
आस्तीन में साँप पल रहे,
और दृष्टि भी पातक है।
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हम सनातनी, हम वैदिक हैं,
ईश्वर से सदा डरें।
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जब-जब बँटे देश में हम तो,
अरि ने प्रबल प्रहार किए।
लाख-करोड़ों कटे-मरे फिर,
अनगिन नर-संहार किए।
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पढ़ें वेद, गीता ग्रंथों को,
निज पहचान करें।
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यदि अब भी नहीं सँभलते,
तो अस्तित्व गँवा बैठेंगे।
देर से शादी, देर से बच्चे,
जोड़ी दौलत दे देंगे।
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ऋण से हम उऋण हो जाएँ,
ऊँची हम शान करें।
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राम-कृष्ण को पढ़ें नित्य हम,
दुष्टों के जो काल बने।
चक्र-सुदर्शन,धनुष बाण से,
दुश्मन का जंजाल बने।
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माला-भाला साथ-साथ हों,
साथी संधान करें।
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© डॉ राकेश चक्र
(एमडी,एक्यूप्रेशर एवं योग विशेषज्ञ)
90 बी, शिवपुरी, मुरादाबाद 244001 उ.प्र. मो. 9456201857
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




