डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – पिया।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३४२ – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के दोहे – पिया ☆ भावना शुक्ल ☆
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नैनन बरसे रात दिन, पिया बिना घर सून।
सूखे अधर पुकारते, अभी कहाँ है जून।।
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सखि बिछुडे जब से पिया, सून हुआ है गाँव।
पग पग जगती पीर है, कभी मिलेगी छाँव।।
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आँगन सूना हो गया, आए कब आवाज।
दीवारे तक पूछतीं, आयेगा कब साज़।।
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याद तुम्हारी आ रही, दिल में उठे हिलोर।
पँछी बनकर मन उड़े, तेरे पुर की ओर।।
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बात अधूरी रह गई, दुख है मुझे अपार।
जाते-जाते कह गये, मिले बिना क्या प्यार।।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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