सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – विरासत …।
रचना संसार # ११५
☆ गीत – विरासत… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ☆
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धरोहर है विरासत ये, हमारी जान से प्यारी।
बहुत अनमोल है अपनी, सुमन से ये सजी क्यारी।।
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बपौती है सुनों वीरों, हमारी ये धरा देखो।
करो बलिदान चरणों में, बनो राणा शिवा देखो।।
करो कुछ काम तुम ऐसे, कि जग में नाम हो भारी।
धरोहर है विरासत ये, हमारी जान से प्यारी।।
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धरा श्रीराम की यह है, किसन के कर्म की धरती।
सबक गद्दार को देती, न आंधी से कभी डरती।।
बबंडर भी डरें हमसे, कभी हिम्मत नहीं हारी।
धरोहर है विरासत ये, हमारी जान से प्यारी ।।
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चले हम सौंप के इसको, सँभालों भी निखारो तुम।
करो रक्षा सदा थाती, गुणों से भी सँवारों तुम।।
छटा पूनम बिखेरो तुम, अमावस भी न हो कारी।
धरोहर है विरासत ये, हमारी जान से प्यारी।।
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अहिंसा राह तुम चल के, पताका प्रेम फहराओ।
बढाओ शान भारत की, सपूतों तुम न घबराओ।।
निभाओ धर्म को अपने, सभी मिल आज नर नारी।
धरोहर है विरासत ये, हमारी जान से प्यारी।।
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© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)
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