सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’
(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता दिखा सको दिशा नयी!!)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # २१ ☆
☆ दिखा सको दिशा नयी !! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆
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दिखा सको दिशा नयी प्रयास ये करो सदा ।
बढ़े चलो बढ़े चलो रुको नहीं कहीं कदा ।।
सुवास फैलती रहे सुकर्म सत्य साथ हो ।
अभाव भी मिटे सभी सदैव संग नाथ हो ।।
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अतुल्य हौंसला मिले किसी नई विहान को ।
खिले कली कहीं कभी निहार के निशान को ।।
सुराग छेड़ दो कहीं नए किसी विधान की ।
बही चले पवित्र धार नेक छंद ज्ञान की ।।
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उड़ान जो भरे उमंग आसमान नाप ले ।
सुलेखनी चले जहांँ अभेद्य सर्व थाह ले ।।
विचार का प्रसार हो बिसार घने शोर को ।
समीर से बहे चलो छुओ हरेक छोर को ।।
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© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”
झालरापाटन राजस्थान
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






