श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “ख़ुलूस अम्न का पैगाम जो न लाया हो…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # ११९ ☆
ख़ुलूस अम्न का पैगाम जो न लाया हो… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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हराम में जो मिले ताज तो कबूल नहीं
फ़ना हो सकता मगर तोड़ना उसूल नहीं
मुआफ़ कोई करें कब तलक ख़ता तेरी
गुनाह जान के करते हो कोई भूल नहीं
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दिलों में कौम के मज़हब के नाम ज़ह्र भरो
ये है जिहाद तो कैसे के ये फ़िज़ूल नहीं
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दे तब्बजो न ग़ज़ल आपने सुनी मेरी
न दो ये दोष मुझे है रकम वसूल नहीं
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ख़ुलूस अम्न का पैगाम जो न लाया हो
ख़ुदा का भेजा हुआ एक भी रसूल नहीं
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अजीब शख़्स है क़ुदरत का सरपरस्त बनें
गुलाब का है निगहबां रुचे बबूल नहीं
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सभी को हक़ है कि तालीम सब करें हासिल
पहुँच से बेटी की तू दूर कर स्कूल नहीं
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महज़ तुम्हीं हो मेरे दिल में दूसरा न कोई
ये मेरा दिल है सनम मानिए क़सूल नहीं
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ये मानता हूँ अरुण फूल सा नहीं नाज़ुक
बशर हूँ नेक मैं वो चुभने वाला शूल नहीं
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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