श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “सफ़र का है हिस्सा न मायूस होना…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १२१ ☆
सफ़र का है हिस्सा न मायूस होना… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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वही मीत बन हमको छलते रहे हैं
मसीहा जिन्हें हम समझते रहे हैं
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जो चाँदी से चमकीले दिखते है अक्सर
वही खोटे सिक्के निकलते रहे हैं
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नहीं कोई ताज़्ज़ुब जो है सीखचों में
सियासत में दागी पनपते रहे हैं
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सफ़र का है हिस्सा न मायूस होना
विजेता तो गिरकर भी चलते रहे हैं
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अलग बात है मीर ग़ालिब की सबसे
सुखनवर कई शेर कहते रहे हैं
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बने हम है फौलाद के आज़मा लो
रबड़ के बने ही लचकते रहे हैं
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अरुण जो चले लेके नेकी का परचम
ज़माने को हरदम अखरते रहे हैं
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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