श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “संग दिल रो पड़े सख्त थे…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १२२ ☆
संग दिल रो पड़े सख्त थे… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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कौम इंसान की आजमाई हुई
स्वार्थ के बिन न इससे भलाई हुई
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आइने पर न तुहमत लगाया करो
सत्य दिखला दिया ये ढिठाई हुई
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वक़्त बिगड़ा अगर तो महल छूटते
लेटने को न हासिल चटाई हुई
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आज भाई बने दुश्मनों की तरह
ज़र ज़मीं की बड़ी बीच खाई हुई
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संग दिल रो पड़े सख्त थे जो बहुत
एक बेटी की जब भी विदाई हुई
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तख्त दौलत न होती किसी की सगी
आज है पास जो कल पराई हुई
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ज़र जमीं औरतें ही रहीं हैं वजह
इस जहां में जहाँ भी लड़ाई हुई
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वो गलत बात चुपचाप करता सहन
पास जो शक्ति उससे सवाई हुई
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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