शुभा रूद्र
कवितेचा उत्सव
☆ अभंग… ☆ शुभा रूद्र ☆
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माय माझी गौरी। तूच नारायणी।
दुःख निवारणी। दुर्गा माते।।
सौंदर्य मोहिनी। तूच अनुसया।
तूच महामाया। शाकंबरी।।
हृदय वासीनी। तूच दुर्गा लक्ष्मी।
प्रार्थीते नेहमी। साधनेत।।
देवी सरस्वती। मन ही गुंतले।
भावही दाटले। हृदयात।।
ढोलक वाजला। टिपरी वाजली।
प्रेमात भिजली। नवरात्री।।
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© शुभा रूद्र
मो. 9657189569
≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈





