सुश्री इन्दिरा किसलय
☆ कविता ☆ ☕ संदली छांह ☕ सुश्री इन्दिरा किसलय ☆
(विश्व चाय दिवस की शुभकामनाएं)
☆
रजाई से मुंह निकालकर
पहली किरण ने कहा
सुप्रभात —
छू ली चाय की प्याली
अपने होठों से
उठती हुई भाप में
मिला दी टटकी मुस्कान–
कोहरे का गुब्बारा फूटा
सोने की मोहरें
बरसीं आँगन में–
सीढ़ियां दरो दीवार
दरख़्त दमके
फूलों के ओसिया नेत्र चमके
पंख सेंके पाखियों ने–
ठिठुरते एहसासों का कारवां
ठहर गया–
खूबसूरत
सुनहरी धूप के गांव में
समय की संदली छांह में –!
☆
© सुश्री इंदिरा किसलय
नागपुर
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





