श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “व्यास पीठ।)

?अभी अभी # ९९३ ⇒ आलेख – व्यास पीठ ? श्री प्रदीप शर्मा ?

सृष्टि में पहले व्यास पीठ की स्थापना हुई, तत्पश्चात ज्ञानपीठ की ! ज्ञानपीठ तो केवल पुरस्कार प्रदान करता है, भक्ति और ज्ञान की गंगा तो केवल व्यास पीठ से ही प्रवाहित होती है !

ज्ञानपीठ में तो कई विद्वान पीठासीन होते हैं, लेकिन व्यास पीठ पर जो वक्ता विराजमान होते हैं, उसी में साक्षात महर्षि वेदव्यास पीठासीन हो जाते हैं।

हरि अनंत हरि कथा अनंता ! जो कथा है वही साहित्य है, कहानी है। संस्कृत में तो कई महाकाव्य रचे गए हैं, लेकिन रानी केतकी की कहानी ही, हिंदी की पहली कहानी कहलाती है। कथा हक़ीक़त होती है, कहानी में यथार्थ और कल्पना का मिश्रण होता है।।

बुद्धि और ज्ञान का जहाँ मिलन होता है, वह ज्ञानपीठ कहलाता है। ज्ञान और भक्ति का मार्ग वैराग्य का मार्ग है। जहाँ सरस्वती का वास है, वही वास्तव में व्यास पीठ है।

भागवत कथाओं का सागर है ! व्यास पीठ की कुछ मर्यादा है। कथा सामने बैठकर सुनी जाती है, पीछे बैठकर अथवा वक्ता के स्थान से ऊपर बैठकर नहीं। शुकतार में शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिनों में जो कथा सुनाई, वही भागवत का सार है। भय से मुक्ति ही मोक्ष का आधार है। तक्षक नाग के काटने से सात दिनों में मृत्यु तो निश्चित है ही, क्यों न समय रहते भागवत कथा के जरिये भगवत स्मरण कर लिया जाए।।

कलयुग में मोक्ष अथवा मुक्ति इतनी आसान नहीं। सात दिनों में अंग्रेज़ी सीखिए की तर्ज़ पर केवल व्यासपीठ से भागवत कथा सुनने से आत्मिक शांति तो मिल सकती है, वैराग्य अथवा मुक्ति नहीं।

भय से मुक्ति और मनोविकारों से छुटकारा ही वैराग्य का आधार है। मृत्यु का भय ही वह तक्षक नाग है। वैराग्य पलायन नहीं, स्थूल संन्यास नहीं, केवल उस परम तत्व की तलाश है। ज्ञानपीठ हो या कोई व्यासपीठ, सत्य की खोज ही इनका आधार है। चिंतन, मनन, ध्यान, धारणा उस अज्ञात और अज्ञेय को पाने की, अथवा जानने की एक सतत प्रक्रिया है, जो अनादिकाल से चली आ रही है। जिन खोजां तिन पाइयाँ, गहरे पानी पैठ। बुद्धि, ज्ञान और विवेक को पीठ न देना ही ज्ञानपीठ का सम्मान करना है, किसी व्यासपीठ का हृदय से आदर करना है।।

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments