श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय आलेख ‘शिवालय…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # १२६ ☆
☆ शिवालय… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
महादेव की गृहस्थी के दर्शन करते समय विचार करें, कि कितने विरोधाभासी जीव बड़ी शांति से इस परिवार में रह रहे हैं। सबकी प्रकृति अलग-अलग है। फिर भी सब शांति से रहते हैं। माँ पार्वती का वाहन शेर है और शिवजी का नंदी है। वृषभ शेर का भोजन है। लेकिन यहाँ कोई बैर नहीं है। कार्तिकेयजी का वाहन मोर है। शिवजी के गले में सर्पों की माला है। मोर और सर्प भी जन्म जात शत्रु हैं। लेकिन यहाँ ये प्रेम पूर्वक एक साथ रहते हैं। गणेशजी का वाहन चूहा है और चूहा भी सर्प का भोजन है। इस परिवार में सब शांति, सद्भाव और निडर जीवन जीते हैं। वैचारिक भिन्नता के कारण सम्भव है कि हमारे घर में भी किसी से न बने। कारण घर में मतभेद हो जाएं। पर तब भी हमारे मनभेद नहीं होने चाहिए। हम सबसे प्रेमपूर्ण व्यवहार करना सीखें। अवश्य ही हमारा घर भी शिवालय बन सकता है।
☆
© श्री राजेन्द्र तिवारी
संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर
मो 9425391435
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/ ≈





