श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “परीक्षा और अग्नि परीक्षा।)

?अभी अभी # ९५५ ⇒ आलेख – परीक्षा और अग्नि परीक्षा ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

परीक्षा तो हम बचपन से देते आ रहे हैं। परीक्षा फल या तो पास होता है अथवा फेल। हर व्यक्ति पास नहीं होता और हर व्यक्ति फेल भी नहीं होता। सफलता और असफलता जीवन के दो आयाम हैं, जो सफल होता है, वह आगे बढ़ जाता है, और जो असफल होता है, वह थोड़ा पीछे रह जाता है। लेकिन संसार में अस्तित्व दोनों प्रकार के लोगों का हमेशा कायम रहता है, कोई जीवन में सफल है, तो कोई असफल। कोई अगर आगे बढ़ रहा है तो कोई पीछे भी छूट रहा है।

जीवन की परीक्षा में सफल होना अपने आपमें एक पुरस्कार है और असफल होना एक सबक। जो आज फेल हुआ हैं, वह कल पास भी हो सकता है।

गारंटीड सक्सेस गाइड से भी लोग जीवन में आगे बढ़े हैं और कोचिंग क्लासेस से भी। कुछ लोग परीक्षाएं पास  करके भी जीवन में सफल नहीं हो पाए और कुछ बिना पढ़े ही बाजी मार ले गए। संभावनाओं और विसंगतियों, सफलता और असफलता का नाम ही तो जिंदगी है।।

कभी कभी हमें जीवन में अग्नि परीक्षा भी देनी पड़ती है। सीता ने भी अग्नि परीक्षा दी थी। भक्त प्रह्लाद की भी एक तरह से अग्नि परीक्षा ही तो थी। अग्नि परीक्षा में सब उत्तीर्ण नहीं होते। सुकरात और मीरा दोनों ने जहर का प्याला पीया। इतिहास में दोनों अमर हैं।

जब जब भी हम अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हैं, वह हमारी अग्नि परीक्षा ही तो होती है। युद्ध में एक सिपाही की अग्नि परीक्षा ही तो होती है, युद्ध में जीत अगर अग्नि परीक्षा है तो युद्ध में शहीद होना भी अग्नि परीक्षा ही है। अग्नि परीक्षा में परिणाम नहीं देखा जाता, त्याग और समर्पण देखा जाता है।।

जो सच्चाई, ईमानदारी और धर्म के मार्ग पर चलते हैं, संसार उनकी अग्नि परीक्षा लेता ही रहता है।

सत्यवादी हरिश्चंद्र एक ही पैदा हुआ है, क्योंकि वह अग्नि परीक्षा में सफल हुआ। आज के युग में सत्य के मार्ग पर चलना कांटों से खेलना है। अगर आप सच के मार्ग पर निःसंकोच निडर होकर चल रहे हैं, तो मान लीजिए आप अग्नि परीक्षा ही दे रहे हैं।

झूठ फरेब, अन्याय, अत्याचार और शोषण की इस दुनिया में एक आम आदमी पल पल में अग्नि परीक्षा दे रहा है, फिर भी वह जिंदा है, क्या यह ईश्वर का चमत्कार नहीं!

आज दुनिया किताबी ज्ञान, आधुनिक विज्ञान और एक नई बीमारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बलबूते पर ही चल रही है। आप परीक्षाएं देते रहिए, गला काट स्पर्धा में आगे बढ़ते रहिए, सफलता के परचम गाड़ते रहिए। निश्चिंत रहिए, आपको जीवन में कोई अग्नि परीक्षा नहीं देनी। वैसे भी होती क्या है अग्नि परीक्षा, गूगल सर्च तो इसे महज एसिड टेस्ट बता रहा है। यह कलयुग है, यहां परीक्षा और अग्नि परीक्षा नहीं, डिजिटल शिक्षा होती है। वैसे डिजिटल क्राइम से बचना भी किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं।।

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© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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