सुश्री मंजिरी “निधि”
(ई-अभिव्यक्ति में बड़ोदा से सुश्री मंजिरी “निधि” जी का स्वागत. गद्य एवं छंद विधा में अभिरुचि के साथ ही महिला उद्यमी। आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय लेख ‘सपने बड़े देखें…‘।)
आलेख – सपने बड़े देखें… ☆ सुश्री मंजिरी “निधि”
हम हमारे जीवन की जो अवधारणा रखते हैं, उसका हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव होता है l यदि जीवन की अवधारणा बड़ी है, तो हमारे सपने बड़े होंगे l
सोलह वर्ष की उम्र में व्यक्ति जिंदगी जीने के लिये जो सपने देखता है उन्हें पूरा करने की लिये वो जी जान लगा देता है l इसीलिये कहते भी हैं कि युवा पीढ़ी का रहन सहन, उनकी भाषा, उनके अधरों पर गाने सुनकर उस राष्ट्र का भविष्य बताया जा सकता है l जीने के लिये यदि विशाल और सृजनशील सपने देखें तो हम स्वयं का, समाज का और राष्ट्र का नक्शा बदल सकते हैं l
बाबा आमटे के अनुसार ऐसे सृजनशील व साहसी युवा पीढ़ी का निर्माण हो जो अच्छी योजनाएं बनाये और उस पर काम भी करे l
चादर देखकर पैर पसारो इस कहावत को भूल कर पैर कितने पसारने हैं उसके हिसाब से चादर का निर्माण करना जरूरी है l
आज की दौर में नई राहें, नये सपने पूरे करने हेतु संघर्ष करना पड़े तो करो l बिपदाओं का सामना कर आगे बढ़ो l
अपयश अपराध नहीं बल्कि आगे जाने की सीढ़ी है l हमारा लक्ष्य बड़े सपने देखना होना चाहिए l उन सपनों को पूरा करने की जिद होनी चाहिए l उन सपनों को कैसे साकार करें इसका चिंतन होना चाहिए l
जीजा माता की प्रेरणा से छत्रपति शिवाजी महाराज ने सिर्फ सोलह वर्ष की आयु में हिन्दवी स्वराजय का सपना देखा था और उसे साकार भी किया l स्वातंत्र वीर विनायक दामोदर सावरकर जी ने सोलह वर्ष की उम्र में अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र करने का इतिहास लिख दिया l
कहने का तातपर्य है कि ऐसे बड़े सपने जीवन की हर क्षेत्र में देखे जाते हैं और उन्हें पूरा करने हेतु अथक प्रयास भी करने होते हैं l एक समय कि बात हैं कि एक पेट्रोल पम्प पर एक लड़का पेट्रोल भरने का काम करता था l एक दिन किसी ने उससे कहा कि पूरी जिंदगी ऐसे पेट्रोल भरता रहेगा कि कोई सपने भी देखें हैं तूने जिंदगी में?
उसने कहा पेट्रोल केमिकल क्षेत्र में मेरी मालिकी की एक बड़ी कम्पनी खोलूंगा ऐसा मेरा सपना है l वहाँ खड़े लोग उसपर हसे l इतना बड़ा सपना?
लोगों ने मजाक उड़ाया कि पहले पेट्रोल तो भर ले….
और वह सपने देखने वाला लड़का और कोई नहीं बल्कि धीरुभाई अम्बानी था जिन्होंने सिद्ध किया कि सपने बड़े देखना चाहिए और उन्हें पूरा करने शिद्द्त से जोर लगा देना चाहिए l
हम सभी अपने कार्य क्षेत्र में ऐसे बड़े सपने देख, उन्हें पूरा कर अपने जीवन को एक नया रूप नया आकार दे सकते हैं l इस बात का मुझे भी स्वानुभव है और पूरा विश्वास भी है कि बड़े सपने देखना जरूरी है और वो पूरे भी होते हैंl
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© सुश्री मंजिरी “निधि”
बड़ोदा, गुजरात
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





