श्री मनजीत सिंह

(प्रख्यात कवि, नाटककर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता श्री मंजीत सिंह जी, ‘ख़ान मंजीत भावड़िया “मजीद”’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में वे पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से भाषा विज्ञान में पी एच डी कर रहे हैं और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं और उर्दू भाषा के संरक्षण व प्रचार प्रसार के प्रति समर्पित हैं। उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियों में “हरियाणवी झलक” (काव्य संग्रह) और “बिराणमाट्टी” (नाटक), रम्ज़ ए उर्दू, हकीकत, सच चुभै सै शामिल हैं, जो हरियाणा की संस्कृति और सामाजिक जीवन की झलक प्रस्तुत करती हैं। उनके साहित्यिक कार्यों को हरियाणा साहित्य अकादमी, हरियाणा उर्दू अकादमी, वैदिक प्रकाशन और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा सम्मानित किया गया है। साहित्य और शिक्षा के साथ-साथ, ख़ान मनजीत अपने पारिवारिक परंपरा से जुड़े हुए एक कुशल कुम्हार (पॉटर) भी हैं।)

आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता “अटल बिहारी वाजपेयी” पर चर्चा।

☆ कविता  ☆ अटल बिहारी वाजपेयी ☆ श्री मनजीत सिंह ☆

 

कलम की बूंद, शब्दों का समन्दर

आप राजनीतिक और कविज्ञआपके अन्दर ,

सबके दिलों में अमृत-सागर, वो नाम अटल है

 

खानदानी सोच, खुशी का सागर,

भारत माँ की गौरव-गाथा गाने वाला

हमेशा खुश चेहरा वाला

वो शब्द, भारत के प्रति सच्ची भक्ति करने वाले

वो नाम अटल है ‌।

 

हृदय-सुंदर, हृदय-शुद्ध, हृदय-सरल,

कविता-का-संग्राम, चलाने वाले

अटल जी के रंग, राजनीतिक-स्थानिक,

हमेशा, वो चांद की चांदनी

वो नाम अटल है

 

अटल जी चले गए,

सर ज़मीन को जीवंत कर गए

हर साल  लाल किले पर नाम पुकारा जाएगा।

 

जब अटल जी कहा, तो लगा,

शब्दशाला में हर शब्द रंगीन  होने लगा

कश्मीर घाटी से कन्याकुमारी तक

वो विचार, हमेशा सराहे  जायेंगे।

वो नाम अटल है

 

वंदे मातरम के साये में,

उनकी साज़ -ए- सुखन, थोड़ी-थोड़ी,

प्यार माँ, भाई है जिसमें शान से

अटल बिहारी बाजपेई पहचान है

आगे बढ़ो, कलम से जुड़े रहो,

ये शायर- ओ- सुखन, तुम्ही के बारे में

वो नाम अटल बिहारी है

 

अटल जी की शख़्सियत, शब्दों में बंधे,

सपनों का भारत, दिल में सजे।

नरम हँसी, तेज़ विचार,

वो शेर‑ए‑हिंदुस्तान, सदा यादगार।

 

वो बोले तो धारा, सदा बहती रहे,

सच्चाई की राह में, कदम बढ़ते रहे।

कवियों के दिल में, उनका स्वर,

अटल बिहारी, अनंत, अनवर।

 

श्री मनजीत सिंह

सहायक प्राध्यापक (उर्दू), कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र 

manjeetbhawaria@gmail.com 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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