श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक सहित्य # ४३२ ☆
आलेख – एआई के क्या उपयोग हों ?
श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆
विश्व आर्थिक मंच की Future of Jobs Report 2025 पढ़ते हुए एक बात विशेष रूप से ध्यान खींचती है। तकनीकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं। एआई और बिग डेटा से जुड़े कौशलों की मांग बढ़ रही है। साथ ही रचनात्मक सोच, जिज्ञासा और सीखते रहने की क्षमता को भी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। यानी मशीनें जितनी सक्षम होती जा रही हैं, मानवीय क्षमता की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है।
यहीं से एआई के बेहतर प्रयोग पर बात शुरू होती है। एआई हमारे लिए क्या-क्या कर सकता है, इसकी सूची लगातार लंबी हो रही है। लेकिन इससे भी जरूरी सवाल है, जो कुछ एआई कर सकता है, क्या वह सब कुछ उसे करने देना चाहिए?
पिछले दिनों सोशल मीडिया पर पढ़ी एक पोस्ट इसी सवाल को बड़े रोचक व्यंग्यात्मक ढंग से सामने रखती है—“I want AI to do my laundry and dishes so that I can do my art and writing, not for AI to do my art and writing so that I can do my laundry and dishes.” अर्थात्, मैं चाहता हूं कि एआई मेरे कपड़े धोए और बर्तन साफ करे, ताकि मैं अपनी कला और लेखन के लिए समय निकाल सकूं। यह नहीं कि एआई मेरी कला और लेखन कर दे और मैं कपड़े धोने-बर्तन साफ करने में लगा रहूं।
बात मजाकिया है, किन्तु संदेश गंभीर है। आज कपड़े धोने की मशीन है। बर्तन साफ करने की मशीन है। खाना बनाने वाले स्वचालित उपकरण हैं। घर की सफाई करने वाले रोबोट हैं। इन उपकरणों को सेंसर, सॉफ्टवेयर और एआई से जोड़ना अब कोई दूर की कल्पना नहीं है। इसके लिए ए आई एजेंट बन चुके हैं।लेकिन यहीं एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है, हमें मशीनों से केवल अपने बौद्धिक काम करवाना नहीं है, काम का सही बंटवारा करना है।
यही एआई के बेहतर प्रयोग की पहली शर्त है। जो काम दोहराव वाले हैं, थकाऊ हैं, समय खाते हैं और जिनमें मानवीय विवेक की बहुत कम जरूरत है, उन्हें एआई को सौंपना समझदारी है। सूचनाएं छांटना, लंबे दस्तावेजों का सार निकालना, डेटा व्यवस्थित करना, नियमित रिपोर्ट तैयार करना, भाषा की त्रुटियां पकड़ना, अनुवाद में सहायता करना, बैठकों के नोट्स बनाना, यात्रा की योजना तैयार करना या सामान्य प्रश्नों के उत्तर देना, ऐसे अनेक काम हैं जिनमें एआई हमारा समय बचा सकता है।
और समय बचना मामूली उपलब्धि नहीं है। आज अधिकांश लोग समय की कमी से परेशान हैं। काम बढ़ते जाते हैं। सूचनाएं बढ़ती जाती हैं। संदेश बढ़ते जाते हैं। लेकिन दिन वही चौबीस घंटे का है। यदि एआई इस दबाव को कम कर सके तो उसका सबसे बड़ा लाभ यही होगा कि वह हमें अधिक रुचि के काम करने के लिए नहीं, बेहतर काम करने के लिए समय दे सकता है।
तकनीक का उपयोग करके यदि हम एक घंटे में वही दस काम करने लगें, जो पहले दो घंटे में करते थे, और फिर बचे हुए घंटे में दस नए काम जोड़ लें, तो हमने जिंदगी आसान नहीं की। हमने केवल अपनी व्यस्तता की गति बढ़ाई है। एआई का बेहतर प्रयोग इससे अलग होना चाहिए। वह हमें दक्ष बनाए, लेकिन लगातार व्यस्त नहीं। वह हमारी उत्पादकता बढ़ाए, लेकिन हमारी बेचैनी नहीं। वह हमारी स्मृति और गणना का बोझ कम करे, ताकि हमारी सोच अधिक गहरी हो सके।
रचनात्मकता के क्षेत्र में भी यही संतुलन जरूरी है। लेखक के लिए एआई विचारों को व्यवस्थित कर सकता है, शोध सामग्री खोजने में सहायता कर सकता है और भाषा सुधार सकता है, लेकिन लेखक की अपनी मौलिक आवाज बनी रहनी चाहिए। कलाकार के लिए एआई नए विकल्प दिखा सकता है और प्रयोगों को आसान बना सकता है, लेकिन कलाकृति की दृष्टि और अंतिम चयन कलाकार का ही होना चाहिए। शिक्षक के लिए एआई पाठ तैयार कर सकता है और विद्यार्थियों के स्तर के अनुसार अभ्यास बना सकता है, लेकिन विद्यार्थी की जिज्ञासा और उसकी व्यक्तिगत परिस्थिति को समझने वाला शिक्षक ही होगा।
यानी एआई को उत्तर देने वाली मशीन से आगे बढ़ाकर सोचने में मदद करने वाला साथी बनाना होगा। मशीन गति दे, मनुष्य दिशा दे। मशीन विकल्प दे, मनुष्य चयन करे। मशीन सूचना दे, मनुष्य उसका अर्थ समझे। मशीन दोहराव वाले काम संभाले, मनुष्य नया सृजन करे।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के 2025 के विश्लेषण में भी संकेत मिलता है कि जनरेटिव एआई का प्रभाव अनेक नौकरियों को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय उनके भीतर किए जाने वाले कार्यों को बदलने के रूप में अधिक दिखाई दे सकता है। इसलिए चुनौती केवल यह नहीं है कि मशीन क्या करेगी। चुनौती यह भी है कि मनुष्य की भूमिका किस दिशा में बदलेगी।
इस बदलाव को दिशा देना हमारे हाथ में है। यदि एआई से मिला अतिरिक्त समय हम और अधिक ईमेल, और अधिक मीटिंग और और अधिक काम में लगा देंगे, तो हमने मिला समय और अवसर गंवा दिया। लेकिन यदि वही समय हम सीखने, सोचने, लिखने, परिवार, मित्रों, कला, प्रकृति और अपने भीतर के संसार को दे सकें, तो एआई का उपयोग कहीं बड़ा हो सकता है।
तब एआई केवल उत्पादकता का औजार नहीं रहता। वह समय को सार्थक बनाने का साधन बन जाता है।
भविष्य में एआई के मूल्यांकन का सबसे सार्थक प्रश्न शायद यही होगा ,उसने हमसे कितना काम करवाया, यह नहीं! उसने हमें कितना बेहतर काम और बेहतर जीवन जीने का अवसर दिया।
कपड़े धुल जाएं। बर्तन साफ हो जाएं। खाना बन जाए। कागज व्यवस्थित हो जाएं। आंकड़े समझ में आ जाएं। लेकिन कविता हम लिखें। चित्र हम बनाएं। सपने हम देखें। निर्णय हम लें। जीवन हम जिएं।
क्योंकि एआई का सर्वोत्तम उपयोग मनुष्य की जगह लेना नहीं है। मनुष्य को उसकी बेहतर संभावनाओं तक पहुंचाना है।
ए आई का हौआ वे ही खड़ा कर रहे दिखते हैं, जो उसे समझते नहीं है, ए आई को दोस्त बनाना समय की जरुरत है।
एआई काम संभाले, हम दिशा संभालें।
एआई समय बचाए, हम उस समय को जीवन में बदलें।
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© श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव
समीक्षक, लेखक, व्यंगयकार
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≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




